किड्स किंगड्म ने उतारे तारे जमीं पे
डबवाली किड्स किंगड्म कॉन्वेंट स्कूल एवं होली नर्सिंग स्कूल सिंघेवाला में शनिवार को तारे जमीं पे कार्यक्रम के तहत इंटर स्कूल फैन्सी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित करके बाल दिवस मनाया।यह जानकारी देते हुए स्कूल संचालन समिति लर्निंग ट्री ऐजुकेशनल सोसायटी के प्रशासक सोहन लाल गुम्बर ने बताया कि फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में वंश अरोड़ा गोपाल शिशु वाटिका ने प्रथम स्थान पाकर 2100 रूपये, बेबी गुनगुन कुक्कड़ धमीजा शिशु वाटिका ने द्वितीय स्थान पाकर 1100 रूपये, अनन्या मिढ़ा गोपाल शिशु वाटिका ने तृतीय स्थान पाकर 500 रूपये का नकद पुरस्कार और ट्रॉफी जीती। इसी वर्ग में बेबी केयर प्ले वे स्कूल के ओरम तथा गोपाल शिशु वाटिका के रूपम को सांत्वना पुस्कार मिला।फैन्सी डे्रस प्रतियोगिता के जूनियर वर्ग में बाल वाटिका स्कूल किलियांवाली के अनिरूद्ध गर्ग ने प्रथम, गोपाल शिशु वाटिका के उदित वधावन ने द्वितीय, श्वेता ने तृतीय स्थान पाया। जबकि सांत्वना पुरस्कार बाल वाटिका स्कूल के आर्तिक को मिला। इस प्रतियोगिता के सीनियर और जूनियर वर्ग में डबवाली तथा किलियांवाली के 15 विद्यालयों के लगभग 100 विद्यार्थियों ने भाग लिया।इस मौके पर मुख्य अतिथि शिरोमणि अकालीदल नेता सुखपाल सिंह किलियांवाली ने भ्रूण हत्या रोकने के लिए महिलाओं को जागरूक होने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में वृक्षारोपण करके पर्यावरण को सुधारा जा सकता है। उन्होंने पंजाब के स्वास्थ्य विभाग पर भू्रण हत्या रोकने के लिए किये जाने वाले प्रयासों को सिर्फ कागजी कार्यवाही बताया। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे समाज का कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि महिलाएं डेरों में जाकर तो सेवा करती हैं लेकिन घर पर सास की सेवा नहीं करतीं। इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष एक्सीयन पब्लिक हैल्थ केके वर्मा ने कहा कि किंड्स किंगड्म स्कूल की प्रबंधक समिति ने गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने का जो फैसला लिया है वह सराहनीय है और उन्हें उम्मीद है कि इस स्कूल का पढ़ा हुआ बच्चा सीबीएसई का टॉप का विद्यार्थी साबित होगा। इस मौके पर उद्योगपति प्रदीप गर्ग, गुरू नानक कॉलेज की प्रिंसीपल डॉ. इन्दिरा अरोड़ा, पेट्रो डीलर संदीप चौधरी की पत्नी सुनीता चौधरी, डॉ. मुकेश गोयल, डॉ. रीतू गोयल, डॉ. रमेश कुमार, रेखा रानी, देव कुमार शर्मा, पूर्व सरपंच जसकरण सिंह भाटी, सतपाल सत्ता, स्कूल प्रबंधक समिति के सचिव अमी लाल, प्रधान अरूणा वर्मा, सोहन लाल गुम्बर, पब्लिक हैल्थ डबवाली के जेई सतपाल, इंजीनियर गिरधारी लाल अग्रवाल, सुधा कामरा, मुकेश कामरा, ओपी सचदेवा, प्रमोद झांब उपस्थित थे।
महन्त को बांधकर लुटेरों ने लाखों रूपये का सोना और नकदी लूटी
डबवाली जिला सिरसा के थाना रोड़ी क्षेत्र के एक डेरा में अज्ञात लुटेरों ने डेरे के महन्त और सेवक को एक कमरे में बांध कर हजारों रूपये की नकदी और लाखों रूपये का सोना लूट लिया।प्राप्त जानकारी अनुसार गांव लहंगेवाला में स्थित डेरा भगवान दास टहलांवाला में शुक्रवार की रात को करीब 11-12 बजे 4-5 अज्ञात व्यक्ति आये। जिनके पास चोटें मारने वाले हथियार थे। इन लुटेरों ने डेरा में प्रवेश करते ही डेरा के महन्त रविदास और सेवक रामदास के चोटें मारीं और उन्हें काबू करके डेरा के एक कमरे में बन्द कर दिया और उनके हाथ-पैर बांध दिये। शनिवार सुबह गांव का सुनील मान नामक युवक डेरा में आया तो उसने देखा कि डेरा का सामान बिखरा हुआ है और एक कमरे के भीतर महन्त और सेवक बंधे हुए हैं। उसने पहले उनको बंधनमुक्त किया और इसकी जानकारी थाना रोड़ी पुलिस को दी। मौका पर एएसपी सज्जन सिंह, थाना रोड़ी प्रभारी, डॉग स्कवैड और फिं गर प्रिंट एक्सपर्ट भी पहुंचे।महन्त रविदास ने पुलिस को बताया कि लुटेरे डेरा से छह लाख रूपये की कीमत का 36 तोले सोना, 20 हजार रूपये की नकदी, एक बन्दूक और कुछ जीवित कारतूस लूट ले गये। पुलिस ने अज्ञात लुटेरों के खिलाफ केस दर्ज करके मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है। पता चला है कि पुलिस ने कुछ संदिग्ध स्थानों पर छापामारी भी की है।
मैं भगवान नहीं : तेंदुलकर
मैंने ईश्वर को देखा है। वह भारत की तरफ से चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करता है। क्रिकेट के शहंशाह सचिन तेंदुलकर पर यह टिप्पणी किसी आम आदमी ने नहीं बल्कि आस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडेन ने की थी। तब से मास्टर बल्लेबाज को क्रिकेट का भगवान की उपाधि दे दी गई। इसके बाद भी कई पूर्व व वर्तमान खिलाडि़यों ने सचिन को भगवान के समकक्ष बताया। मगर खुद सचिन इस बात से विनम्रता से इनकार करते हुए कहते हैं कि मैं भगवान नहीं हूं। मुझे बस लोगों का अपार प्यार मिलता है और मुझे भारत की ओर से खेलना बेहद पसंद है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रविवार को 20 साल पूरे करने वाले तेंदुलकर ने कहा कि मुझे बहुत खुशी होती है कि इतने अधिक लोग मेरे करियर का अनुसरण करते हैं। मैं भी इंसान हूं, लेकिन मेरे पीछे एक बड़ी शक्ति, बड़ी टीम है। मेरे साथी खिलाड़ी, परिवार, बच्चे, दोस्त और प्रशंसक हैं। मैं जब बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर जाता हूं तो मैं उनकी तरफ से खेलता हूं। तेंदुलकर ने अपने करियर में बल्लेबाजी के कई रिकार्ड तोड़े, लेकिन इस दौरान दो बार उन्हें लगा कि उनका करियर समाप्त हो गया है। ठीक 20 साल पहले 15 नवंबर 1989 को कराची में खेले गए अपने पहले टेस्ट मैच के बारे में इस स्टार बल्लेबाज ने कहा कि पहली बार पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट के बाद मुझे ऐसा लगा। मैंने केवल 15 रन बनाए और मैंने सोचा कि क्या मुझे अगले मैच में खेलने का मौका मिलेगा, लेकिन मुझे यह मौका मिला। जब मैंने दूसरे मैच में 58 या 59 रन बनाए तो मुझे बड़ी राहत मिली। दूसरी बार तब जब मैं टेनिस एल्बो चोट से पीडि़त था। यह बहुत मुश्किल समय था। मैं रात को सो नहीं पाता था और मुझे लगा कि मेरा करियर समाप्त हो गया है। तेंदुलकर ने पिछले साल चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ 140 रन की मैच विजेता पारी को आस्ट्रेलियाई तेज आक्रमण के खिलाफ पर्थ में 1991 में खेली गई 119 रन की पारी से ऊपर रखा क्योंकि यह शतक उन्होंने मुंबई आतंकी हमले के बाद लगाया था। उन्होंने कहा कि मैं कह सकता हूं कि पर्थ की पारी मेरी चोटी की पारियों में शामिल है। लेकिन पिछले साल चेन्नई में मैंने जो पारी खेली वह सभी से ऊपर है क्योंकि इस मैच से कुछ दिन पहले मुंबई में भयावह घटना घटी थी। इसकी भरपाई नहीं की जा सकती, लेकिन इस जीत से हम कुछ पलों के लिए उनका ध्यान बांटने में सफल रहे। तेंदुलकर से जब पूछा गया कि क्या उनका पुत्र अर्जुन भी उनके नक्शेकदम पर चलकर क्रिकेट खेलेगा, उन्होंने कहा कि वह अभी दस साल का है और मैं उस पर क्रिकेट खेलने का दबाव नहीं डालूंगा। यदि उसे क्रिकेट खेलनी है तो पहले उसे इस खेल को अपने दिल में बसाना होगा तेंदुलकर और फिर इसके बारे में सोचना होगा। यह बात सिर्फ अर्जुन ही नहीं बल्कि सभी युवाओं पर लागू होती है। कप्तानी के बारे में उन्होंने कहा कि मुझे कभी नहीं लगा कि यह बोझ है। निश्चित तौर पर देश की कप्तानी करना सम्मान है। यह अलग तरह का अनुभव है। हमने आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच जीता। टाइटन कप जीता और टोरंटो में पाकिस्तान को हराया, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ बारबडोस में 120 रन का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए। मैंने इस दौर का भी लुत्फ उठाया और इससे काफी कुछ सीखा।
मैंने ईश्वर को देखा है। वह भारत की तरफ से चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करता है। क्रिकेट के शहंशाह सचिन तेंदुलकर पर यह टिप्पणी किसी आम आदमी ने नहीं बल्कि आस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडेन ने की थी। तब से मास्टर बल्लेबाज को क्रिकेट का भगवान की उपाधि दे दी गई। इसके बाद भी कई पूर्व व वर्तमान खिलाडि़यों ने सचिन को भगवान के समकक्ष बताया। मगर खुद सचिन इस बात से विनम्रता से इनकार करते हुए कहते हैं कि मैं भगवान नहीं हूं। मुझे बस लोगों का अपार प्यार मिलता है और मुझे भारत की ओर से खेलना बेहद पसंद है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रविवार को 20 साल पूरे करने वाले तेंदुलकर ने कहा कि मुझे बहुत खुशी होती है कि इतने अधिक लोग मेरे करियर का अनुसरण करते हैं। मैं भी इंसान हूं, लेकिन मेरे पीछे एक बड़ी शक्ति, बड़ी टीम है। मेरे साथी खिलाड़ी, परिवार, बच्चे, दोस्त और प्रशंसक हैं। मैं जब बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर जाता हूं तो मैं उनकी तरफ से खेलता हूं। तेंदुलकर ने अपने करियर में बल्लेबाजी के कई रिकार्ड तोड़े, लेकिन इस दौरान दो बार उन्हें लगा कि उनका करियर समाप्त हो गया है। ठीक 20 साल पहले 15 नवंबर 1989 को कराची में खेले गए अपने पहले टेस्ट मैच के बारे में इस स्टार बल्लेबाज ने कहा कि पहली बार पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट के बाद मुझे ऐसा लगा। मैंने केवल 15 रन बनाए और मैंने सोचा कि क्या मुझे अगले मैच में खेलने का मौका मिलेगा, लेकिन मुझे यह मौका मिला। जब मैंने दूसरे मैच में 58 या 59 रन बनाए तो मुझे बड़ी राहत मिली। दूसरी बार तब जब मैं टेनिस एल्बो चोट से पीडि़त था। यह बहुत मुश्किल समय था। मैं रात को सो नहीं पाता था और मुझे लगा कि मेरा करियर समाप्त हो गया है। तेंदुलकर ने पिछले साल चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ 140 रन की मैच विजेता पारी को आस्ट्रेलियाई तेज आक्रमण के खिलाफ पर्थ में 1991 में खेली गई 119 रन की पारी से ऊपर रखा क्योंकि यह शतक उन्होंने मुंबई आतंकी हमले के बाद लगाया था। उन्होंने कहा कि मैं कह सकता हूं कि पर्थ की पारी मेरी चोटी की पारियों में शामिल है। लेकिन पिछले साल चेन्नई में मैंने जो पारी खेली वह सभी से ऊपर है क्योंकि इस मैच से कुछ दिन पहले मुंबई में भयावह घटना घटी थी। इसकी भरपाई नहीं की जा सकती, लेकिन इस जीत से हम कुछ पलों के लिए उनका ध्यान बांटने में सफल रहे। तेंदुलकर से जब पूछा गया कि क्या उनका पुत्र अर्जुन भी उनके नक्शेकदम पर चलकर क्रिकेट खेलेगा, उन्होंने कहा कि वह अभी दस साल का है और मैं उस पर क्रिकेट खेलने का दबाव नहीं डालूंगा। यदि उसे क्रिकेट खेलनी है तो पहले उसे इस खेल को अपने दिल में बसाना होगा तेंदुलकर और फिर इसके बारे में सोचना होगा। यह बात सिर्फ अर्जुन ही नहीं बल्कि सभी युवाओं पर लागू होती है। कप्तानी के बारे में उन्होंने कहा कि मुझे कभी नहीं लगा कि यह बोझ है। निश्चित तौर पर देश की कप्तानी करना सम्मान है। यह अलग तरह का अनुभव है। हमने आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच जीता। टाइटन कप जीता और टोरंटो में पाकिस्तान को हराया, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ बारबडोस में 120 रन का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए। मैंने इस दौर का भी लुत्फ उठाया और इससे काफी कुछ सीखा।
ताऊ के रास्ते दिल तक जाएंगे हुड्डा
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल भले ही धुर राजनीतिक विरोधी रहे हों लेकिन लगता है कि हुड्डा भी कभी न कभी ताऊ के जनसंपर्क स्टाइल के कायल रहे हैं। तभी तो आज हुड्डा का कारवां मदीना जाते हुए रोहतक के गांव बहुअकबरपुर में सड़क किनारे टेंट लगा देख अचानक ठहर गया। हुड्डा न केवल अपने वाहन से उतरे बल्कि टेंट लगे घर में भी गए। वहां जाकर हुड्डा को पता चला कि इस घर की महिला हुकमो देवी का देहावसान हो गया है। हुड्डा ने शोकाकुल परिवार के दुख में शरीक होते हुए हुकमो देवी को श्रद्धांजलि दी तथा पूरे परिवार को ढांढस बंधाया। पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल भी अपने कार्यकाल में कुछ ऐसा ही करते थे। उनका काफिला अचानक कहीं भी रुक जाता था और ताऊ लोगों के बीच बैठकर उनके सुख-दुख में शरीक होते। मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने भी आज कुछ ऐसा ही किया। मुख्यमंत्री को अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गांव मदीना में आनंद सिंह दांगी के निवास पर जाना था। वहां आनंद सिंह दांगी की भाभी रुकमणी देवी का निधन हो गया है। जब हुड्डा का काफिला रोहतक से मदीना के लिए रवाना हुआ तो गांव बहुअकबरपुर में बाई ओर सड़क के किनारे लगे टेंट को देखकर हुड्डा ने अपनी गाड़ी रुकवाई और वे तुरंत उस घर में पहुंच गए। जहां शोक सभा हो रही थी। मुख्यमंत्री की अचानक उपस्थिति को देखकर ग्रामीण आश्चर्यचकित रह गए। आज भूपी ने लोगों के बीच अचानक पहुंचकर न केवल ताऊ की यादें ताजा कर दी हैं बल्कि अपने सामाजिक होने का अहसास भी कराया है। मुख्यमंत्री ने मदीना पहुंचकर महम के विधायक आनंद सिंह दांगी की भाभी के निधन पर भी दुख व्यक्त किया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल भले ही धुर राजनीतिक विरोधी रहे हों लेकिन लगता है कि हुड्डा भी कभी न कभी ताऊ के जनसंपर्क स्टाइल के कायल रहे हैं। तभी तो आज हुड्डा का कारवां मदीना जाते हुए रोहतक के गांव बहुअकबरपुर में सड़क किनारे टेंट लगा देख अचानक ठहर गया। हुड्डा न केवल अपने वाहन से उतरे बल्कि टेंट लगे घर में भी गए। वहां जाकर हुड्डा को पता चला कि इस घर की महिला हुकमो देवी का देहावसान हो गया है। हुड्डा ने शोकाकुल परिवार के दुख में शरीक होते हुए हुकमो देवी को श्रद्धांजलि दी तथा पूरे परिवार को ढांढस बंधाया। पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल भी अपने कार्यकाल में कुछ ऐसा ही करते थे। उनका काफिला अचानक कहीं भी रुक जाता था और ताऊ लोगों के बीच बैठकर उनके सुख-दुख में शरीक होते। मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने भी आज कुछ ऐसा ही किया। मुख्यमंत्री को अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गांव मदीना में आनंद सिंह दांगी के निवास पर जाना था। वहां आनंद सिंह दांगी की भाभी रुकमणी देवी का निधन हो गया है। जब हुड्डा का काफिला रोहतक से मदीना के लिए रवाना हुआ तो गांव बहुअकबरपुर में बाई ओर सड़क के किनारे लगे टेंट को देखकर हुड्डा ने अपनी गाड़ी रुकवाई और वे तुरंत उस घर में पहुंच गए। जहां शोक सभा हो रही थी। मुख्यमंत्री की अचानक उपस्थिति को देखकर ग्रामीण आश्चर्यचकित रह गए। आज भूपी ने लोगों के बीच अचानक पहुंचकर न केवल ताऊ की यादें ताजा कर दी हैं बल्कि अपने सामाजिक होने का अहसास भी कराया है। मुख्यमंत्री ने मदीना पहुंचकर महम के विधायक आनंद सिंह दांगी की भाभी के निधन पर भी दुख व्यक्त किया।



