बर्लिन। भारत दुनिया के भ्रष्टतम देशों में शुमार है। सकार क्षेत्र में भ्रष्टाचार के मामले में 180 देशों की सूची में भारत का स्थानर 84वां है। दुनिया में भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की बुधवार को एक साथ विभिन्न देशों में जारी वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के मुकाबले पाकिस्तान में भ्रष्टाचार ज्यादा है। 2.4 अंकों के सात वह 138वें स्थान पर है। भ्रष्टाचार के मामले में जो देश इस सूची में सबसे निचले पायदान पर हैं, वे सभी संघर्ष य हिंस से प्रभावित हैं। इनमें अफगानिस्तान, म्यांमार, इराक, सोमालिया और सूडान प्रमुख हैं। इस सूची में न्यूजीलैंड, डेनमार्क और सिंगापुर ईमानदार देशों में शुमार किए गए हैं। सर्विया, घाना, पेरू और बुर्किना फासो जैसे विकासशील देशों की स्थिति भारत से बेहतर है। उन्हें इस सूची में क्रमश: 83, 79 और 75वें स्थान पर रखा गया है। चीन की स्थिति भी भारत से थो़डी बेहतर है। उसे 3.6 अंक मिले हैं। भारत के अन्य प़डोसी देशों में नेपाल 143वें स्थान के साथ भारत से काफी नीचे है जबकि बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ 139वें स्थान पर है। श्रीलंका 3.1 अंकों के साथ 97वें स्थान पर है। स्विस बैंकिंग कानून बदलने की सिफारिश संस्था ने पहली बार सिफारिश की है कि स्विट्जरलैंड जैसे देशों के बैंकिंग कानून में संशोधन किया जाना चाहिए, जहां काली कमाई को सुरक्षित रखा जाता है। संस्था ने कहा कि अब समय आ गया है जब बैंकिंग कानून में गोपनीयता का प्रावधान समाप्त होना चाहिए। ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के प्रमुख आरएच तहलियानी ने कहा कि उनकी संस्था ने पाया कि गरीबी और भ्रष्टाचार में सीधा संबंध है, जिससे गरीबी से ल़डने में मुश्किल आ रही है तथा संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य हासिल करने की कोशिश भी नाकाम
राष्ट्रीय जांच एजेंसी देशद्रोहियों को खोजने व आतंकी हमलों की साजिशें नाकाम करने में जुटी है, वहीं एसटीएफ और पुलिस ने मंगलवार को कोलकाता में 31 लाख, दिल्ली में 10, मुंबई में 2.5 लाख की नकली करेंसी बरामद की। 31 लाख की नगदी तो अकेले लश्कर-हुजी से जुड़े तीन बांग्लादेशी आंतकियों से बरामद हुई है जिन्हें धर्मतल्ला में दबोचा गया। ये तीनों श्रमजीवी एक्सप्रेस धमाके और हैदराबाद एसटीएफ कार्यालय पर दफ्तर पर हमले में शामिल रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि हजार और पांच सौ के नोटों की यह खेपें बांग्लादेश के रास्ते देश में पहुंची है। एसटीएफ प्रमुख राजीव कुमार ने बताया कि आतंकियों अब्दुल बाकी, मुहम्मद तहिदुर और अब्दुल रहमान को धर्मतल्ला में उस वक्त दबोचा गया, जब वह बस स्टैंड पर मालदा जाने वाली गाड़ी के बारे में पूछ रहे थे। उनके बैगों से 31 लाख की करेंसी, फर्जी डीएल, वोटर आईडी मिले हैं। एसटीएफ प्रमुख ने कहा, तीनों मुर्शिदाबाद जिले से ट्रेन द्वारा कोलकाता पहुंचे थे। अब्दुल बाकी हैदराबाद स्थित एसटीएफ दफ्तर पर हमले में शामिल था जबकि तहिदुर श्रमजीवी एक्सप्रेस विस्फोट कांड में शामिल रहा। तीनों पाकिस्तान शाहिद बिलाल ग्रुप से जुड़े हैं,जो लश्कर-ए- तैयबा और हरकत उल जिहाद अल इस्लामी (हुजी) को आतंकी उपलब्ध करवाता है। पूछताछ में पता चला है कि अब्दुल रहमान हीली सीमा से घुसपैठ कर गत अप्रैल माह में भारत आया था जबकि बाकी कब आए इसका पता जांच के बाद चलेगा। कुमार ने कहा,आतंकियों से गिरोह के अन्य सदस्यों तथा कोलकाता में मौजूद मददगारों के बारे में पूछताछ की जा रही है। वहीं, दिल्ली पुलिस के सहायक आयुक्त नीरज ठाकुर ने बताया, पुलिस ने सफदरगंज इनक्लेव के निकट कमल सिनेमा के पास से वसीम, मजीबुर रहमान, रोहित यादव और विपिन खारी नामक व्यक्ति को दस लाख की नकली करेंसी के साथ पकड़ा। इसी प्रकार महाराष्ट्र एटीएस ने सेंट्रल मुंबई के सिवोन-कोलीवाडा क्षेत्र से झारखंड के पांच लोगों को ढाई लाख के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया।
अपने देश में सड़क दुर्घटनाओं के लिए व्यक्तियों को सूली पर चढ़ाने की परंपरा है, जबकि विभागीय संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी से साफ बच निकलती हैं। भारत में सालाना करीब एक लाख 40 हजार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें 90 प्रतिशत मामलों में ड्राइवर को दोषी माना जाता है लापरवाही से गाड़ी चलाने का मुकदमा चलता है। सिर्फ आठ प्रतिशत मामलों में वाहन मालिकों को कसूरवार ठहराया जाता है। दो फीसदी दुर्घटनाओं में ही पीडब्लूडी, ट्रैफिक पुलिस या आरटीओ की जिम्मेदारी तय होती है। ऐसे मामले अपवाद ही हैं जहां गढ्डेदार सड़क, गलत मोड़, बेढब ढलान, बेवजह स्पीड बे्रकर, मिट्टी-रोड़ी-बजरी जैसे बेजा अवरोध, गलत या अनुपस्थित यातायात संकेतक अथवा त्रुटिपूर्ण यातायात व्यवस्था और इनसे जुड़े विभागों को दुर्घटना के लिए जिम्मेदार माना गया हो, जबकि पचास प्रतिशत दुर्घटनाओं में इन की प्रत्यक्ष या परोक्ष भूमिका होती है। यहां तक कि वाहन में निर्माणगत खराबी भी दुर्घटना का कारण हो सकती है, जिसके लिए वाहन निर्माता की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए लेकिन भारत में कानूनी प्रावधान होते हुए भी ज्यादातर विभाग दुर्घटना की जिम्मेदारी से साफ बच निकलते हैं। मोटर वाहन एक्ट, 1988 की धारा 135 में बाकायदा इस बात की व्यवस्था है कि प्रत्येक दुर्घटना की राज्य सरकार द्वारा विधिवत जांच एवं विश्लेषण होना चाहिए ताकि हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों तथा एजेंसियों की जिम्मेदार तय की जा सके। परंतु इस नियम की शायद ही कोई परवाह की जाती है। नतीजतन कई मर्तबा बेगुनाहों को सजा हो जाती है, जबकि असली गुनहगार छूट जाते हैं और दुर्घटनाओं को बढ़ाते रहते हैं। किसका है कसूर : सड़क हादसों के लिए दूसरे कारक किस तरह जिम्मेदार हो सकते हैं, इसे समझने के लिए मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर 1995 के दौरान हुए हादसों की जांच पर निगाह डालना उचित रहेगा। उस समय यह एक्सप्रेस-वे नया-नया बना था और इस पर एक के बाद एक दुर्घटनाएं हो रही थीं। जब गहन जांच हुई तो पाया गया कि दुर्घटनाएं टायरों की वजह से हो रही थीं जिन्हें एक्सप्रेस-वे जैसी परिस्थितियां झेलने के लिए नहीं बनाया गया था। इसके बाद वहां ट्रकों के लिए रफ्तार सीमा तय कर दी गई, जिससे दुर्घटनाएं थम गई। दूसरा उदाहरण दिल्ली-गुड़गांव और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे का है। अब तक जिम्मेदार एजेंसियों ने इनके कारणों की समुचित जांच नहीं की है। इन दोनों एक्सप्रेस-वे के डिजाइन में गंभीर खामियां हैं जिससे गलत जगहों पर निकासी और प्रवेश के रास्ते दे दिए गए हैं। इसके अलावा दूसरी गड़बड़ी गलत-अस्पष्ट-छोटे एवं भ्रामक यातायात संकेतक तथा प्रकाश की अपर्याप्त व्यवस्था की है।

