नई दिल्ली । जाटों को केंद्रीय स्तर पर ओबीसी श्रेणी में आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर जाट बिरादरी आर-पार की लड़ाई के मूड में है। इस मांग को लेकर सोमवार को जाट समुदाय के लोग बड़ी संख्या में राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में जुटेंगे। रैली का उद्देश्य सरकार को यह एहसास कराना है कि जाटों को उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। रैली में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात के अलावा अन्य प्रांतों के लोग भी हिस्सा लेंगे। रैली में 5 हजार बसें, 8 हजार टै्रक्टर और बुग्गी सहित कारों व मोटरसाइकिलों का काफिला होगा। विभिन्न राजनैतिक दलों में बंटे जाटों को एक मंच पर लाने के लिए पिछले एक साल से विभिन्न प्रदेशों में 3 सौ से अधिक बैठकें की गई हैं। महारैली की आयोजक अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति गांव-गांव 'आरक्षण ज्योति' का भ्रमण करा चुकी है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि राजनैतिक पार्टियों ने हमेशा जाट समुदाय के साथ छल किया है और उनकों वाजिब हक से वंचित रखा है। समिति के महासचिव पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि ओबीसी की केंद्रीय श्रेणी की सूची से हर राज्य का जाट गायब है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बिहार और गुजरात में राज्य स्तर पर आरक्षण मिल रहा है, मगर केंद्र सरकार ओबीसी के तहत जाटों को आरक्षण देने के लिए तैयार नहीं है। समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी एमआर तेवरिया कहते हैं कि अब लड़ाई आर-पार की होगी। उनका कहना है कि रामलीला मैदान सोमवार को इसका गवाह बनेगा। महारैली की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
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