संयुक्त कर्मचारी मंच हरियाणा से सम्बन्धित हरियाणा बिजली कर्मचारी मंच के कार्यकर्ताओं ने मंच के प्रदेशाध्यक्ष खेता राम की अध्यक्षता में एक्सीयन तथा एसडीई के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इधर एक्सीयन ने प्रदर्शन को बेहुदा करार देते हुए इसे कामचोरों का प्रदर्शन बताया।
प्रदर्शनकारियों को बिजली कर्मचारी मंच के राज्य प्रधान खेता राम, उपप्रधान राजेन्द्र सिंह राठी, उपमहासचिव मेहर सिंह बांगड़, मुख्य संगठनकर्ता सतपाल सिंह पन्नू, वित्त सचिव राजेन्द्र सिंह मलिक, सोनीपत सर्कल सचिव राजेन्द्र कौशिक, यूनिट सचिव महेन्द्र सिंह मलिक, उपमहासचिव आर.डी. शर्मा, भाग सिंह, सर्कल सचिव हरभजन सिंह गिल, यूनिट प्रधान मोहन लाल ने भी सम्बोधित किया।
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि डबवाली एक्सीयन कार्यालय में कर्मचारियों के एसीपी केस, हाऊस रेंट अलाऊंस केस, सीएफसी फॉर सबस्टेशन, कर्मचारियों की पे स्लीप, पेंशन केस, ड्राईंग सेक्शन के लिए कम्प्यूटर का प्रबन्ध आदि मांगे काफी समय से लम्बित हैं। बार-बार प्रयास करने के बाद भी एक्सीयन ने इस मांगों का कोई समाधान नहीं किया।उन्होनें आरोप लगाया कि 8 मार्च को 1 बजे का समय एक्सीयन ने यूनियन के साथ बातचीत के लिए दिया था। लेकिन जानबूझकर कार्यालय में हाजिर नहीं हुए। जिसके चलते यूनियन को आज मजबूरन प्रदर्शन का फैसला लेना पड़ा।राज्य अध्यक्ष खेता राम ने सरकार की कर्मचारी व जनविरोधी नीतियों, निजीकरण, छंटनी, ठेकेदारी प्रथा आदि की कड़े शब्दों में निन्दा करते हुए सरकार व निगम मैनेजमेंट का गुडग़ाव व पानीपत सर्कलों को फ्रेंचाईजी को सौंपने का फैसला कर्मचारी विरोधी बताया।
इस प्रदर्शन के दौरान इस संवाददाता से बातचीत करते हुए राज्य अध्यक्ष खेता राम ने कहा कि निजीकरण की प्रक्रिया के चलते अधिकारी कर्मचारियों पर ओवर लोड डाल रहे हैं और छुट्टी के दिन भी उन्हें काम के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गत दिवस बिना किसी कारण के कर्मचारियों का तबादले कर दिये गये। उनकी मांग है कि अधिकारी अपना रवैया बदलें और बिना किसी कारण के किये गये तबादले रद्द किये जायें।इस प्रदर्शन में रविन्द्र मैहता, सिरसा यूनिट प्रधान मदन लाल, चौटाला सब यूनिट प्रधान मनी राम, उपप्रधान हरविन्द्र सिंह, राजदेव गांव डबवाली भी शामिल हुए। कर्मचारियों ने अधिकारियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।इस संदर्भ में जब एक्सीयन आरके वर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि जनहित में शिकायत के आधार पर सम्बन्धित कर्मचारियों के तबादले किये गये थे। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कर्मचारी निगम के काम को नहीं करना चाहते, इसलिए वे अधिकारियों पर अपना दबाव बनाकर फरलो पर रहना चाहते हैं।

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