डबवाली | गांव तेजाखेड़ा के जलघर की डिग्गी में एक छोटी सी दोस्ती की कहानी ने दम तोड़ दिया। एक ही कक्षा मेंपढऩे वाले गांव के दो किशोर रविवार सुबह यहां खेलने आए, लेकिन देर शाम डिग्गी से उनकी लाशें निकलीं। दोनोंके परिजनों और गांव वालों का कहनाहै कि हो न होवे जलघर में लगे अमरूद के पेड़ पर चढ़े होंगे और हो सकता हैकि पेड़ से टहनियों की फिसलन से डिग्गी में गिर गए हों।शीशपाल और विष्णु गांव दोनों आठवीं में पढ़ते थे। दोनोंमें खूब छनती थी। दोनों की उम्र पंद्रह बरस के आस पास थी। रविवार को छुट्टी का दिन था, सो दोनों सुबह 8 बजेही अपने अपने घर से खेलने के लिए निकल पड़े। शीशपाल के पिता विनोद सुथार के मुताबिक सुबह से शाम होनेलगी और दोनों की कोई पता न चला, यहां तक कि वे दोपहर को खाना खाने भी घर नहीं आए।शाम तक दोनों नहींलौटे तो उनके परिजनों को चिंता हुई और उनकी तलाश शुरू हुई तो जलघर की डिग्गी में शीशपाल और विष्णु कीचप्पलें तैरती नजर आईं। इससे दोनों के डिग्गी में गिरने का आशंका उपजी। तुरत फुरत गांव के तैराक पप्पू (35) पुत्र रामरख को बुलाया गया। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रामरख ने शीशपाल और विष्णु को खोजलिया, लेकिन तब तक उनकी सांसें उखड़ चुकी थीं।


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