फाइव स्टार होटलों के आलीशान शौचालयों से लेकर घर-घर की जरूरत बन चुका टॉयलेट पेपर पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि साधारण कागज के लिए जितने पेड़ कटते हैं वहीं मलमल की तरह मुलायम टॉयलेट पेपर के लिए उससे कहीं अधिक संख्या में पेड़ों की कटाई होती है। पर्यावरणविदों का कहना है कि पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए टॉयलेट पेपर के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के साथ ही शौचालयों में इसके विकल्प पेश किए जाने चाहिए नहीं तो आने वाले समय में यह पर्यावरण विनाश के एक प्रमुख कारकों में शामिल होगा। पर्यावरण से जुड़े प्रतिष्ठित संगठन टेरी के वैज्ञानिक डॉ. सुनील ने इस संबंध में कहा कि भारत जैसे विशाल देश में टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल हतोत्साहित किया जाना चाहिए क्योंकि इससे बहुत अधिक संख्या में पेड़ों की कटाई होगी और पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा। पर्यावरणविदों की यह भी शिकायत है कि भारत में इस संबंध में जागरूकता नहीं के बराबर है। हालांकि उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय देशों में रिसाइक्ल्ड पेपर से बने टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यह प्रक्रिया भी आसान और पर्यावरण के अनुकूल नहीं है। रिसाइक्ल्ड पेपर से पहले स्याही को साफ करके फिर उसे प्रोसेस किया जाता है लेकिन स्याही को साफ करने की इस प्रक्रिया की अपनी चुनौतियां हैं। इस प्रक्रिया में पेपर को ब्लीच करने के लिए क्लोरीन इस्तेमाल की जाती है। क्लोरीन आधारित रसायन पेपर फाइबर के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं और इससे डाइऑक्सिन और ऑर्गैनोक्लोरीन जैसे विषैले पदार्थ निकलते हैं। डाइऑक्सिन लोगों में कैंसर, सीखने की क्षमता को प्रभावित करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटाने और मधुमेह जैसी बीमारियों को जन्म दे सकता है। अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण संगठन ग्रीन पीस ने पिछले दिनों अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि कोटोनेल तथा स्कॉट जैसे दो प्रमुख अमेरिकी टॉयलेट पेपर ब्रांडों के लिए 22 फीसदी पल्प कनाडा के उन जंगलों से आया जहां कुछ पेड़ दो सौ साल तक पुराने हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि टॉयलेट पेपर के लिए न केवल पेड़ों की कटाई एक महत्वपूर्ण मुद्दा है बल्कि इससे उन जीव जंतुओं के अस्तित्व को भी खतरा पैदा हो गया है जो इन जंगलों में सदियों से रहते आ रहे हैं। टॉयलेट पेपर की शुरुआत की कहानी बेहद दिलचस्प है। इतिहास बताता है कि सबसे पहले 1391 में चीन में महाराजाओं के इस्तेमाल के लिए टॉयलेट पेपर बनाया गया और उसके कई सदियों बाद 1857 में जोसेफ गेटी ने सबसे पहला फैक्ट्री निर्मित टॉयलेट पेपर बाजार में पेश किया। इसके बाद 1871 में जेथ वीलर ने टॉयलेट पेपर के रोल का पेटेंट कराया। टॉयलेट पेपर के पेटेंट को लेकर भी कई अदालती लड़ाइयां लड़ी गईं और अंतत: 1894 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ओलिवर हावलेट हिक्स के पेटेंट दावे को सेथ वीलर के पक्ष में खारिज कर दिया। टॉयलेट पेपर का पश्चिमी देशों की संस्कृति में क्या स्थान है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां 26 अगस्त को टॉयलेट पेपर डे मनाया जाता है। ऐतिहासिक तथ्यों से पता चलता है कि 1880 से पहले टॉयलेट पेपर के स्थान पर लोग पहले पत्तों, डंडियों, रेत और कपड़े आदि का इस्तेमाल किया जाता था। लोग मल साफ करने के लिए प्राचीन समय में किन चीजों का इस्तेमाल करते थे, यह उनके पर्यावरण पर निर्भर करता था। जैसे दुनिया के उत्तरी हिस्से में रहने वाले लोग, विशेषकर एस्किमो गर्मी के मौसम में टुंड्रा घास तथा सर्दियों में बर्फ का इस्तेमाल करते थे। इसी प्रकार तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोग सीपों और नारियल के पुराने खोलों तथा अमेरिका के औपनिवेशक काल में लोग भुट्टे की खोखली डंडी, उत्तर भारत में गन्ने के लंबे छिल्के आदि का प्रयोग करते थे। यह जानकारी कुछ हास्यास्पद लग सकती है लेकिन प्राचीन रोम में इस काम के लिए एक लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता था जिसके एक सिरे पर नमकीन पानी में डूबा स्पंज का टुकड़ा लगा होता था। गौरतलब है कि लगभग पूरी दुनिया में लोग एक दूसरे से दायां हाथ ही मिलाते हैं और दुनिया के पूर्वी हिस्से में लोग खाना खाने के लिए दाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं। बायां हाथ मिलाना जहां असभ्यता की निशानी माना जाता है वहीं छोटे बच्चों को बाएं हाथ से खाना खाने से हतोत्साहित किया जाता है और यह बात अधिकतर संस्कृतियों का हिस्सा बन चुकी है - इसका सबसे बड़ा कारण यही रहा है कि बाएं हाथ का इस्तेमाल मल साफ करने के लिए किया जाता है। यह साफ है कि प्राचीन काल के रीति रिवाजों पर 21वीं सदी में लौटना संभव नहीं है लेकिन टॉयलेट पेपर का विकल्प तलाशने की जरूरत है।

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मौसम ने हवा कर दिया पटाखों का जहर

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दीपावली के त्योहार ने इस बार रात तो रोशन की ही, हवा में जहर भी कुछ कम घोला। एयर पलूशन में पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कमी आई है। एक्सपर्ट इसकी सबसे बड़ी वजह मौसम की मेहरबानी को मान रहे हैं। हालांकि पटाखों के शोर ने परेशान किया। दोनों तरह के पलूशन का सबसे ज्यादा असर रात 9 से 12 बजे के बीच रहा, यानी दिल्ली सरकार का 10 बजे के बाद पटाखे नहीं जलाने की चेतावनी का दिल्लीवालों पर कोई असर नहीं पड़ा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के मुताबिक एयर पलूशन के मामले में थोड़ी राहत मिली है, क्योंकि सल्फर डाई ऑक्साइड को छोड़कर बाकी कंटेंट में पिछले साल के मुकाबले कमी दर्ज की गई है। सीपीसीबी की स्टडी के मुताबिक ऐसा हल्के और इंपोर्टड पटाखों में सल्फर डाई ऑक्साइड का इस्तेमाल बढ़ने के कारण हुआ है। सीपीसीबी के डायरेक्टर डॉ. एस. डी. मखीजनी ने बताया कि इस बार हवा में एसपीएम, आरएसपीएम और एनओ-टू में कमी की सबसे बड़ी वजह मौसम की मेहरबानी रही है। दीपावली के दिन तापमान 25.2 डिग्री दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल यह 24.5 डिग्री दर्ज हुआ था। साथ ही हवा की गति भी पिछले साल 0.13 के मुकाबले इस बार 0. 20 रही है। इसी तरह से हवा में नमी की मात्रा भी पिछले साल के 60.8 फीसदी के मुकाबले इस बार 49.8 फीसदी रही है। यही वजह है कि इस बार पटाखों के प्रदूषण का बड़ा हिस्सा हवा के साथ पृथ्वी के सर्फेस एरिया से काफी ऊपर चला गया। रिपोर्ट के मुताबिक पीतमपुरा को छोड़कर हर जगह सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है। पिछले साल इसका कंसंट्रेशन लेवल 7 से 24 के बीच था, जबकि इस बार यह 8 से 42 के बीच दर्ज हुआ है। एयर पलूशन के बाकी कंटेंट - नाइट्रोजन ऑक्साइड, सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर और रेस्पिरेबल सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा में कमी आई है। सीपीसीबी ने दीपावली की रात दिल्ली के सात इलाकों- आईटीओ, पीतमपुरा, सीरीफोर्ट, जनकपुरी, निजामुद्दीन, शहजादाबाग और शाहदरा स्टेशनों में एयर पलूशन की मात्रा को हर घंटे रेकॉर्ड किया। दिल्ली के नौ में से तीन लोकेशन में नॉयज पलूशन बढ़ा है, एक लोकेशन पर इसमें कमी आई है और बाकी जगह पिछले साल जितना ही रहा है। हालांकि, अधिकतम ध्वनि सीमा इस बार 82 डेसिबल ही रही है, जबकि पिछले साल इसका स्तर 85 डेसिबल दर्ज हुआ था। नॉयज पलूशन को आंकने के लिए नौ जगहों- लाजपत नगर, ईस्ट अर्जुन नगर, मयूर विहार फेज-दो, पीतमपुरा, कमला नगर, दिलशाद गार्डन, अंसारी नगर, कनॉट प्लेस और आईटीओ में स्टेशन बनाए गए थे।

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Posted in October 18, 2009
by arun singla



अमेरिकन लेडी पहुंची एचपीएस में
डबवाली (Arun singla) अमेरिकन लेडी डैब्बी ने बुधवार को हरियाणा पब्लिक डे-बोर्डिंग स्कूल, शेरगढ़ में अपने शैक्षणिक भ्रमण व शिक्षण के दौरान कहा कि शिक्षा के व्यवहारिक ज्ञान के लिए जिस वातावरण की जरूरत होती है सब इस स्कूल में बच्चों को दी जा रही है। भारतीय भ्रमण के लिए आई अमेरिकन लेडी जोकि आर्किटेकट हैं, दो दिनों में बच्चों को अंग्रेजी के विषय के बारे में जानकारी देंगी तथा यहां के स्टाफ को नई-नई विधाओं के बारे में जानकारी देंगी। बच्चों को अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन में केवल पैसे कमाने के लिए ही नहीं अपितु दूसरों की सहायता करने के लिए बहुत जरूरी है और सभी को कम-से-कम यूनिवर्सिटी तक की शिक्षा जरूर ग्रहण करनी चाहिए। विद्यालय अनुशासन को देखकर आत्मविभोर होकर उन्होंने कहा कि इस अनुशासन से ही भारत की ताकत व संयम का ज्ञान मिलता है। शिक्षा से ही हमें शांति मिलती है और हम शांति फैला सकते हैं। शिक्षा के लिए केवल किताबी ज्ञान ही प्राप्त नहीं अपितु व्यवहारिक ज्ञान होना भी जरूरी है। इसके लिए भ्रमण की हॉबी अत्याधिक कारगर होती है। इसी उद्देश्य से वह भ्रमण के लिए भारत प्रथम बार आई है हालांकि अन्य देशों में भी भ्रमण किया है। परस्पर संवाद के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा रहेगी एचपीएस के विद्यार्थियों को अमेरिका के विद्यार्थियों से स्कूल के सहयोग से पत्राचार एवं ईमेल से संवाद स्थापित हो ताकि अच्छे रिश्तों के साथ-साथ परस्पर ज्ञान का भी आदान-प्रदान कर सकें। उन्होंने कहा कि वे शिक्षक नहीं अपितु उनके पास ऐसे कुछ विचार हैं जिससे शिक्षा तनाव मुक्त व ज्ञानवद्र्धक हो सकती है। गणित के अध्ययन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इस विषय पर विद्यार्थियों को ओर अधिक ध्यान देना चाहिए। इसके बाद उन्होंने बच्चों की जिज्ञासाओं को तृप्त किया तथा उनके सवालों का स्टीक उत्तर दिया। उन्होंने माना कि केवल पैसा ही किसी देश को विकसित नहीं बनाता केवल शिक्षा ही है जिसके बल पर कोई भी देश विकसित बन जाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के स्कूल सिस्टम में सप्ताहिक टैस्ट को अत्याधिक महत्व दिया जाता है और छुट्टी के दिन कोई काम नहीं दिया जाता।

दुबई गई डांसर के घर से चोर हजारों का सामान चुरा ले गये
डबवाली (arun singla ) नीलू आर्केस्ट्रा की डांसर पिंकी खान के घर का ताला तोड़ कर अज्ञात चोर करीब 15 हजार रूपये का सामान चुरा ले गये। यह जानकारी देते हुए नीलू आर्केस्ट्रा के मालिक पवन बांसल ने बताया कि पिंकी खान पिछले एक माह से अपने कार्यक्रम करने के लिए दुबई गई हुई है। उसके घर पर ताला लगा हुआ था। बुधवार सुबह पड़ौसियों ने उसे सूचना दी कि पिंकी खान के घर का ताला टूटा हुआ है और सामान बिखरा हुआ है। वह तुरन्त वहां पहुंचा और इसकी सूचना गोल बाजार पुलिस चौकी को दी। मौका पर पहुंची पुलिस ने देखा कि सामान बिखरा हुआ है और कमरों के ताले टूटे हुए हैं तथा गोदरेज की अलमारी का ताला भी टूटा हुआ है। अलमारी में रखे कपड़े चद्दरें गायब हैं। ड्राइंग रूम में पड़ा कलर टीवी गायब है। बांसल ने बताया कि पिंकी खान उनके ग्रुप के साथ पिछले 4 वर्षों से काम रही है और पब्ेिलक क्लब के पीछे अपने मकान में अपनी दादी कमला खान के साथ रह रही है।

पानी की बारी को लेकर किसान भिड़े, दो घायल
डबवाली (Arun singla) गांव देसूजोधा में पानी की बारी को लेकर किसानों में हुए झगड़े में दो जनों के चोटें आई हैं। जिन्हें घायल अवस्था में यहां के सिविल अस्पताल में लाया गया। घायल मंगू सिंह पुत्र रूप सिंह ने बताया कि मंगलवार रात को उनकी पानी की बारी थी और वे खेत में खड़े थे। इसी दौरान उनका उनके खेत के पड़ौसी काका सिंह बगैरा से पानी की बारी को लेकर झगड़ा हो गया। जिस पर तैश में आये काका सिंह, जीत सिंह, डीसी सिंह, केवल सिंह, अमृत सिंह, गुरलाल सिंह आदि ने उन पर हमला करके चोटें मारी। इस हमले में वह तथा लाभ सिंह पुत्र बाबू सिंह घायल हो गये।

गंगा में दो पक्षों में झगड़ा, महिला सहित तीन घायल
डबवाली (Arun singla) गांव गंगा में हुए एक झगड़े में जंगीरो पत्नी तेजा सिंह के चोटें आई हैं। जिसे गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। घायल जंगीरो ने बताया कि वह अपने बेटे कल्लू के साथ बुधवार सुबह ट्रेक्टर पर घर लौट रही थी कि मार्ग में स्कूटर लगाकर तीन युवकों ने उन्हें रोक लिया और उन पर बालियों और साईकिल के चिमटे से हमला बोल दिया। इस दौरान जैसे-तैसे स्वयं को छुड़वाकर कल्लू तो भाग निकला। लेकिन आरोपियों ने उसकी बुरी तरह से पिटाई कर दी। लोगों ने उठाकर उसे अस्पताल पहुंचाया। जंगीरो ने आरोपियों के नाम अमर, भगता आदि बताये हैं और साथ में यह भी कहा है कि यह युवक नशे में थे। इधर घायल भगता राम ने बताया कि वह अपने दोस्त अमर सिंह के साथ गांव में ही मोटरसाईकिल पर जा रहा था कि सामने से आ रही एक ट्रेक्टर-ट्राली उनके पास रूकी और उन्होंने ट्रेक्टर-ट्राली पर सवार पाला राम, मटरू राम, गलिया, दीपा और बाबा आदि उन्हें घूरने लगे। इसका कारण पूछने पर आरोपियों ने उनसे कहा कि वे उनकी गली में न आयें। इस बात को लेकर उनमें तू तू-मैं मैं हो गई और आरोपियों ने उन पर तेजधार हथियार ेसे हमला करके घायल कर दिया।

अज्ञात वाहन की टक्कर से मोटरसाइकिल सवार की मौत
वोट डालकर वापिस जा रहा था एडवोकेट चरणजीत सिंहऔढ़ां

(Arun singla) गांव साहुवाला प्रथम के पास वोट डालकर वापिस जा रहे एक एडवोकेट की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। बताया जाता है कि एमआईटीसी कालोनी सिरसा के निवासी एडवोकेट चरणजीत सिंह अपने पुराने गांव मिठडी में विधानसभा का वोट डालकर अपने मोटरसाइकिल पर वापिस सिरसा जा रहा था कि गांव साहुवाला के पास किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। सूचना मिलने पर भाई कन्हैया समिति सिरसा की एंबूलेंस द्वारा उसे घायलावस्था में सिरसा के सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया जहां से प्रथमिक उपचार के बाद रोहतक रैफर कर दिया। रोहतक ले जाते समय रास्ते में उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस थाना बड़ागुढ़ा ने मृतक के पुत्र रमणीक सिंह की शिकायत पर अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाते हुए जान से मारने का मुकदर्मा दर्ज कर लिया है। इस संबंध में श्रवण कुमार एसआई से बात किए जाने पर उन्होंने बताया कि अज्ञात वाहन व चालक की तलाश की जा रही है और उसका शीघ्र ही पता लगा लिया जाएगा।

पालिका अध्यक्षा की कार का शीशा अज्ञात ने तोड़ा
डबवाली (Arun singla) यहां के वार्ड नं. 4 में नगरपालिका अध्यक्षा सिम्पा जैन के निवास स्थान के सामने खड़ी उनकी कार को किसी अज्ञात व्यक्ति ने बुधवार को ईंट मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया। यह जानकारी देते हुए सिम्पा जैन के पति राजेन्द्र जैन ने बताया कि वह दोपहर को घर आये हैं और खाना खाने के बाद जैसे ही घर से बाहर निकले तो देखा कि कार का अगला शीशा टूटा पड़ा है। जिस पर ईंट के निशान हैं। उन्होंने बताया कि ईंट कार पर मारने की आवाज इसलिए सुनाई नहीं दी कि उस समय बिजली गुल थी और जनरेटर चल रहे थे।


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Posted in October 17, 2009
by arun singla



































































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Posted in October 14, 2009
by arun singla

Ajay Choutala is Near For Victory

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