Posted in October 30, 2009
by arun singla

रद्द होंगे सांसदों के जॉब कार्ड
भोपाल। केंद्रीय राज्यमंत्री अरुण यादव और उनके परिजनों को राष्ट्रीय रोजगार गारंटी स्कीम के तहत मजदूरी भुगतान का मामला उजागर होने के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अब सांसद विधायक और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के जॉब कार्ड निरस्त करेगा। विभाग जिला और जनपद पंचायत स्तर पर साइबर सिक्युरिटी को मजबूत करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने बताया कि नरेगा के तहत जॉबकार्ड वितरण व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। उपयोग न किए जाने वाले जिले के गणमान्य व्यक्तियों को जारी जॉबकार्ड निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि कलेक्टरों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार ऐसे सभी जॉबकार्ड जो सांसदों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों एवं जनपद पंचायत अध्यक्षों के नाम अथवा उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बने है, उन्हें निरस्त किया जाए। इसके साथ ही कलेक्टरों से कहा जा रहा है कि अन्य प्रमुख व्यक्तियों की सूची तैयार कर ऐसी ही कार्रवाई के लिए जिले के प्रभारी मंत्री से अनुमोदन प्राप्त किया जाए। भार्गव ने बताया कि नरेगा के ऑॅनलाईन डाटा के साथ छेड़छाड़ की फिर कोई घटना न हो इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाए रहे हैं। जिला और जनपद पंचायत स्तर पर साईबर सिक्योरिटी की व्यवस्था को मजबूत बनाया जाएगा। पासवर्ड व्यवस्था में भी सुधार के उपाय किए जाएंगे, ताकि भविष्य में डाटा के साथ इस प्रकार की छेडख़ानी नहीं की जा सके। इस संबंध में भारत सरकार के साथ समन्वय हेतु लिखा जा चुका है।

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by arun singla

चीते को बसाने पर मचा बवाल
जयराम रमेश की परियोजना पर बाघ विशेषज्ञ उठाने लगे हैं सवालअफ्रीकी चीते के लिए भारत में नहीं है घास के मैदाननई दिल्ली। क्योटो प्रोटोकॉल को लेकर विवाद में आए केंद्रीय पर्यावरण व वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयराम रमेश की चीता परियोजना पर भी बवाल मचने लगा है। बाघ विशेषज्ञों ने यह कहकर एतराज जताना शुरू कर दिया है कि अफ्रीकी चीते के लिए भारत में घास के मैदान नहीं हैं, ऐसे में यह चीता कहां दौड़ेगा। उल्लेखनीय है कि भारत में चीता पांचवे दशक की शुरुआत में लुप्त हो गया था। बाघ विशेषज्ञों के तेवरों से साफ है कि मामला प्रधानमंत्री दरबार में पहुंच सकता है। हालांकि अभी देहरादून स्थित वन्यजीव संस्थान इस परियोजना का अध्ययन कर रहा है।किसान फिर चीते को जिंदा नहीं छोड़ेंगे इसकी रिपोर्ट के बाद ही मामला आगे बढ़ेगा। लेकिन बाघ विशेषज्ञ ही नहीं बल्कि खुद पर्यावरण व वन मंत्रालय में भी इस योजना की सफलता पर आशंका जताई जा रही है। राष्ट्रीय टाइगर संरक्षण प्राधिकरण की पिछले दिनों हुई बैठक में भी ज्यादातर सदस्यों ने इस परियोजना पर सवाल खड़े कर दिए। प्राधिकरण की सदस्य व सांसद मेनका गांधी ने से कहा कि चीते को भारत लाना बेहद बड़ी गलती होगी। उन्होंने इसके कई कारण भी गिनाए। एक तो अफ्रीकी चीता घास के मैदानों में रहता है, जंगलों में नहीं। यहां घास के बड़े मैदान नहीं हैं। ऐसे में यह चीता खेतों में दौड़ने लगेगा। इससे फसल चौपट होगी और किसान फिर चीते को जिंदा नहीं छोड़ेंगे।कम से कम एक दर्जन चीता लाने होंगेइसके अलावा चीते को आबाद करने के लिए कम से कम एक दर्जन चीता लाने होंगे। इतने ज्यादा चीते भला कौन देगा। चीता परिवार के भाई-बहन कभी भी आपस में परिवार नहीं बसाते। लेकिन यहां एक ही परिवार से पैदा बच्चों में बीमारियों का ज्यादा खतरा रहेगा। इससे उनकी संख्या भी नहीं बढ़ पाएगी। फिर एक ही रास्ता बचेगा कि चीता को चिड़ियाघर में डाल देना पड़ेगा।कहां पाया जाता है चीताचीता खुली जगह, छोटा मैदान, अर्द्घ-शुष्क क्षेत्र जहां शिकार उपलब्ध हो, वहां पाया जाता है। एशियाई चीते ईरान के कवीर रेगिस्तानी क्षेत्र के अलावा पाकिस्तान के बलूचिस्तान में भी पाए जाते हैं। 90 के दशक तक ईरान में चीतों की संख्या 200 से अधिक थी, लेकिन अब 50 से 100 के बीच है।क्या है चीता परियोजनालगभग छह दशक पहले भारत ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के जंगलों से गायब हो चुके चीते को दोबारा आबाद करने की मुहिम जयराम रमेश ने छेड़ी है। विशेषज्ञों के मुताबिक अफ्रीकी चीता यहां के जंगलों में बसाया जा सकता है। क्योंकि दोनों महाद्‌वीपों के चीतों में जेनेटिक तौर पर अंतर नहीं है।

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by arun singla

आग से जयपुर में रेल मार्ग हुआ बंद
जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे ने जयपुर के सीतापुरा इलाके में आईओसी डिपो में कल शाम से लगी भीषण आग को देखते हुए जयपुर -सवाई माधोपुर मार्ग पर ट्रेनों का संचालन आगामी आदेश तक रोक दिया है। जयपुर -सवाई माधोपुर रेल मार्ग आईओसी डिपो से कुछ फर्लांग की दूरी पर है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जनसम्पर्क अधिकारी यशवन्त कुमार शर्मा के अनुसार आईओसी डिपो में आग लगने के बाद इस मार्ग से गुजरने वाली तीन गाड़ियां रद्‌द कर दी गई हैं तथा जयपुर से सवाई माधोपुर की ओर जाने वाली और सवाई माधोपुर से जयपुर की ओर आने वाली अन्य गाड़ियों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगले आदेश तक जयपुर - सवाई माधोपुर रेल मार्ग पर यातायात बंद रहेगा।कई ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तनशर्मा के अनुसार जयपुर-एर्नाकुलम, जोधपुर-इन्दौर, भोपाल-जोधपुर, बांद्रा-जयपुर, मुम्बई सैंट्रल-जयपुर, मुम्बई-जयपुर, जबलपुर-जयपुर गाड़ियों को परिवर्तित मार्ग फुलेरा, चितौड़गढ़-अजमेर के रास्ते भेजा जा रहा है और इसी रास्ते वे वापस भी आ रही हैं। उन्होंने बताया कि जयपुर-राजेन्द्र नगर गाड़ी बांदीकुई से जयपुर होते हुए अजमेर भेजी जा रही है जबकि पुरी से जयपुर की गाड़ी भरतपुर बांदीकुई के रास्ते चलाई जा रही है। शर्मा के अनुसार जयपुर-श्यामगढ, जयपुर-बयाना समेत तीन गाडियां रदद कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि आग लगने के कुछ घंटे बाद जयपुर आने वाली स्पेशल ट्रेन को वनस्थली रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया।कुछ समय की प्रतीक्षा के बाद इस ट्रेन को वनस्थली पर ही समाप्त कर पुन बयाना के लिए रवाना किया गया। शर्मा के अनुसार जयपुर -सवाई माधोपुर रेल मार्ग पर यातायात अगले आदेश तक निरस्त रहेगा।

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by arun singla

नागपुर में मैच, दिल्ली में सट्टा, तीन अरेस्ट
नई दिल्ली।। बुधवार को जब नागपुर में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे मैच चल रहा था, उस दौरान दिल्ली के शकरपुर इलाके में अपने घर में बैठकर 3 भाई हाईटेक तरीके से इस मैच पर सट्टा लगा रहे थे। पुलिस ने इनके घर पर रेड डाली और इन तीनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान अभिनव उर्फ लकी उर्फ आनंद (28), अनिल सलूजा उर्फ मनु (26) और रवि सलूजा (24) के रूप में हुई। ये तीनों लक्ष्मी नगर के गुरु रामदास नगर में रहते हैं। पुलिस ने इनके घर से 3 टीवी सेट, एक लैपटॉप, एक नेट कनेक्शन सेट, एक कैलकुलेटर, 2 रजिस्टर, मोबाइल फोन चार्ज करने के 5 एक्सटेंशन बोर्ड, 126 मोबाइल फोन, 36 मोबाइल चार्जर, 2 वॉकी टॉकी फोन और एक रिमोट जब्त किया है। जिस वक्त पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया, उस वक्त मैच चल रहा था और तब तक ये लोग एक करोड़ से ज्यादा का सट्टा लगा चुके थे। अडिशनल डीसीपी (ईस्ट डिस्ट्रिक्ट) ओ. पी. मिश्रा के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि शकरपुर इलाके के एक घर में भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच पर सट्टा लगाया जा रहा है। पुलिस ने गुरु रामदास नगर स्थित उस मकान पर छापा मारा और वहां से इन तीनों अभियुक्तों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि ये लोग 2 महीने से यह रैकेट चला रहे थे और पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए लगातार अपनी लोकेशन बदलते रहते थे। यह रैकेट पहले मुंबई से ऑपरेट किया जाता था, लेकिन बाद में इसे फरीदाबाद और गुड़गांव से ऑपरेट किया जाने लगा। रैकेट के सदस्य दिल्ली के विभिन्न इलाकों में काम करते थे और क्रिकेट मैचों पर सट्टा लगवाते थे। एक तरफ ये लोग गुड़गांव और फरीदाबाद में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में रहते थे और उनसे लगातार सट्टे के रेट लेते रहते थे, वहीं दूसरी तरफ ये लोग अपने ग्राहकों के संपर्क में रहकर उनसे भी रेट लेते रहते थे। चूंकि संपर्क का सारा काम मोबाइल के जरिए होता था, इसलिए इन लोगों ने कई मोबाइल ले रखे थे। अपने ग्राहकों को भी ये लोग अलग अलग मोबाइल नंबर देते थे। मैच की स्थिति के हिसाब से सट्टे के भाव ऊपर-नीचे होते रहते थे। मैच खत्म होने के बाद इनके साथी कस्टमर से मिलकर पैसे कलेक्ट करते थे और फिर यह रकम आपस में बांट ली जाती थी। पूछताछ में पता चला कि यह रैकेट मैचों के अलावा चुनावों के दौरान भी राजनीतिक पार्टियों की हार-जीत पर सट्टा लगवाता था।

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30-10-09

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by arun singla

भारत-पाक: मनमोहन ने 'दोस्ती का हाथ' बढ़ाया
मनमोहन सिंह ने भारत प्रशासित कश्मीर के युवाओं से ख़ास अपील की है-----------
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अनंतनाग में कहा है कि वे व्यापार, लोगों की आवाजाही, अमन और विकास के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. उन्होंने ये भी कहा कि वे चाहते हैं कि उन्होंने जो दोस्ती का हाथ बढ़ाया है, पाकिस्तान उसे आगे बढ़कर स्वीकार करे.भारत प्रशासित कश्मीर में अनंतनाग में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत लाभदायक तभी होगी यदि 'पाकिस्तान अतंकवाद पर काबू पाए और भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को सज़ा दिलाए.'उन्होंने वहाँ 18 किलोमीटर लंबी अनंतनाग-काजीगुंड रेलवे लाइन का उदघाटन भी किया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "पाकिस्तान में अधिकतर लोग भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं. वे स्थायी अमन चाहते हैं और हम भी यही चाहते हैं. नियंत्रण रेखा (कश्मीर) के दोनों ओर व्यापार के और ज़रिए उपलब्ध कराने ज़रूरी है. भारत और पाकिस्तानी के क़ैदी अपनी सज़ा पूरी करने के बाद भी जेलों में रहते हैं."उनका कहना था, "हमें इन मसलों में पाकिस्तान का सहयोग चाहिए. हम इन सभी मसलों पर पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. लेकिन मुफ़ीद बातचीत के लिए ज़रूरी है कि आतंकवाद पर काबू पाया जाए. पाकिस्तान में जो लोग भारत में आतंकवाद फैलाना चाहते हैं, फिर वे चाहे ग़ैर-सरकारी ही हों, उनके तंत्र को नष्ट किया जाए और उन्हें सज़ा दिलाई जाए. मैं पाकिस्तान के आवाम और सरकार से अपील करता हूँ कि वे सच्चाई और नेक इरादों के साथ हमारा साथ दे....हमने जो दोस्ती का हाथ बढ़ाया है वे आगे बढ़कर उसे स्वीकार करें."उन्होंने कहा, "कश्मीर के लोगों में स्थायी अमन कायम होने का विश्वास जागा है. आतंकवादी भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी का माहौल कायम रखना चाहते हैं. उन्होंने मज़हब का ग़लत इस्तेमाल किया है. उनकी सोच के लिए हमारे बीच कोई जगह नहीं है. ये हमारी भाईचारे की रिवायत के ख़िलाफ़ है." उनका कहना था कि राजनीतिक मक़सदों के लिए चरमपंथ का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में मनमोहन सिंह ने एक शेर भी सुना डाला, "कुछ ऐसे भी मंजर हैं तारीख़ की राहों में; लम्हों ने ख़ता की थी, सदियों ने सज़ा पाई.."'ख़ून-ख़राबे का दौर ख़त्म हो रहा है'-------------------------जम्मू-कश्मीर के लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने पिछले कई वर्षों में केंद्र सरकार की ओर वहाँ शुरु की गई परियोजनाओं की ज़िक्र किया.मनमोहन सिंह का कहना था, "कश्मीर में ख़ून-ख़राबे और आतंकवाद का दौर ख़त्म हो रहा है. आम आदमी समस्याओं को बातचीत से सुलझाना चाहता है. हम पहले भी कह चुके हैं कि जो भी ख़ून-ख़राबा छोड़े दे, हम उससे बात करने को तैयार हैं. गोल-मेज़ सम्मेलन भी हुआ था. मैं फिर कहना चाहता हूँ कि हम उन सभी लोगों से बात करने को तैयार है जो कश्मीर में अमन और विकास चाहते हैं. हम सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं. हमने ये कमज़ोरी के तहत नहीं कहा है. हमने पहले पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत भी की थी. जम्मू-कश्मीर के समग्र हल की बातचीत भी उसमें शामिल थी."उन्होंने भारत प्रशासित कश्मीर के युवाओं से भी अपील की कि वे 'एक नए राज्य के विकास में हाथ बटाएँ.' उनका कहना था कि उन्हें युवाओं की मायूसियों का अहसास है पर हालात बदल रहे हैं और वे भी खुले दिल और दिमाग से सोचें.संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी का कहना था, "चुनावों में हिस्सा लेकर आपने (कश्मीरियों) दुनिया को दिखा दिया है कि आप अमन, विकास और लोकतांत्रिक में विश्वास है...मसले होंगे लेकिन मसलों का हल बातचीत से ही हो सकता है. तरक्की में लोग हिस्सेदारी महसूस करें और पर्यटन क्षेत्र फिर ज़ोर पकड़े...रेल लाइन बनने से आना-जाना, आपसी जुड़ाव, भाईचारा बढ़ेगा और लोकतंत्र मज़बूत होगा."राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने भाषण में कहा कि समय-समय पर केंद्र सरकार ने राज्य की मदद की है. उनका कहना था कि यदि राज्य को बंदूक से आज़ादी चाहिए तो उसे उस राजनीति से बाहर निकालना होगा जिसमें उसे धकेला गया था.रेल मंत्री ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा, "जनसमर्थन के बिना ये रेल लाइन नहीं बन सकती थी. फ़ारूक़ अब्दुल्ला के अनुरोध के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में तीन और परियोजनाओं पर विचार होगा. उर्दू में भी रेल भर्ती के लिए परीक्षा होगी. किसानों ख़ास तौर पर छोटे किसानों के भूमि अधिग्रहण के बदले में मुआवज़े के बारे जो माँगे आई हैं, उन पर विचार किया जाएगा."
माओवादियों के कब्ज़े से निकली ट्रेन
ट्रेन के ड्राईवर को रिहा करा लिया गया हैदिल्ली से भुवनेश्वर जा रही राजधानी एक्सप्रेस के अग़वा ड्राइवर को माओवादियों के चंगुल से रिहा करा लिया गया है और अब ट्रेन पूरी सुरक्षा में दिल्ली के लिए रवाना हो गई है.ग़ौरतलब है कि मंगलवार की दोपहर माओवादियों ने पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में राजधानी एक्सप्रेस के ड्राइवर को अग़वा कर ट्रेन को अपने क़ब्ज़े में लिया था. इसमें 300 से ज़्यादा यात्री इसमें फंसे हुए थे.केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने बताया, '' 'ट्रेन बिल्कुल सुरक्षित है. सारे यात्री सुरक्षित हैं. सीआरपीएफ और राज्य पुलिस मौके पर है और पूरा इलाक़ा सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है.''सरकार को राजधानी एक्सप्रेस से माओवादियों का क़ब्ज़ा हटाने के लिए सुरक्षाबलों से भरी एक दूसरी ट्रेन वहाँ भेजनी पड़ी.गोलीबारीपुलिस अधिकारी कुलदीप सिंह ने बीबीसी को बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी तादाद में पुलिस बल को रवाना किया गया है पर इन पुलिसबलों को माओवादियों की ओर से गोलीबारी का सामना भी करना पड़ा.हालांकि माओवादी नेता किशन जी ने इस अपहरण की ज़िम्मेदारी लेने से इनकार किया है लेकिन माओवादियों के सहयोगी माने जाने वाले एक संगठन ने इसकी ज़िम्मेदारी ली है.इस संगठन के असित महतो ने कहा कि जब माओवादियों की ओर से बंद का आहवान किया गया है तो फिर ट्रेनों के चलने का क्या मतलब है. अगर ट्रेनें चलेंगी तो उन्हें किसी भी तरह से रोका जाएगा.उन्होंने यह भी कहा कि हज़ारों की तादाद में लोगों ने ईंट-पत्थर फेंककर रेलगाड़ियों को रोका है. हालांकि राजधानी के मसले में रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि किसी ने शार्ट सर्किट करके सिग्नल बदल दिया और ड्राइवर को गाड़ी रोकनी पड़ी.रिपोर्टों के अनुसार ट्रेन जिस वक़्त झाड़ग्राम स्टेशन के पास पहुँच रही थी और घने जंगलों वाले इलाके से गुज़र रही थी उसी वक़्त अचानक रेल सिग्नल लाल हो गया. ड्राइवर ने गाड़ी को रोका.गाड़ी रुकते ही कुछ हथियारबंद लोगों ने ट्रेन के इंजन को घेर लिया. कपड़ों से मुंह ढके ये लोग इंजन पर चढ़ गए और इंजन से इन लोगों ने चालक आनंद राव को अगवा कर लिया.
पेशावर में बड़ा धमाका, 100 की मौत
पाकिस्तान के पूर्वोत्तर शहर पेशावर में हुए धमाके में कम से कम 100 लोग मारे गए हैं और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.ये धमाका पेशावर के भीड़भाड़ वाले इलाक़े पीपलमंडी में हुआ.इस धमाके के बाद शहर में सफ़ेद धुएँ के बादल उठते देखे गए और आसपास की इमारतों में आग लग गई.पुलिस अधिकारी अनवर शाह ने समाचार एजेंसी एएफ़सी को बताया कि कार में विस्फोटक से ये धमाका किया गया.उनका कहना था,''ये बड़ा बम धमाका था और इसकी गूंज पूरे शहर में सुनाई दी.''पेशावर के अस्पताल के डॉक्टर ज़फर इक़बाल का कहना था कि इस धमाके में 12 से अधिक लोग घायल हुए हैं जिनमें से कई की हालत गंभीर है.उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी सेना दक्षिणी वज़ीरिस्तान इलाक़े में तालेबान के ख़िलाफ़ अभियान चला रही है और इसके बाद से ऐसे धमाकों में तेज़ी आई है.ये धमाका ऐसे वक्त हुआ है जब अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन पाकिस्तान यात्रा पर हैं.


हुड्डा की अग्नि परीक्षा
मुख्यमंत्री पद पर दूसरी बार आसीन होने के बाद अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधानसभा में अग्नि परीक्षा देनी होगी। कल बुधवार को उन्हें सदन में बहुमत साबित करना है। वैसे आकड़ों के खेल में हुड्डा को बहुमत साबित करने में ज्यादा दिक्कत पेश नहीं आएगी, फिर भी आखिरी वक्त में क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता। बहुमत साबित करने के लिए 45 विधायकों का जादुई आंकड़ा चाहिए। इस वक्त कांग्रेस के अपने 40 विधायकों के साथ कांग्रेस को 7 निर्दलीय व बीएसपी के एक विधायक का समर्थन हासिल है। इस प्रकार कांग्रेस के पास 48 विधायकों का आंकड़ा है। फिलवक्त हजकां के 6 विधायक भी कांग्रेस को समर्थन देते दिख रहे हैं पर हजकां का कोई भी पैंतरा सरकार का स्थायीत्व तय करेगा। अगर हजकां के सूबा प्रधान कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस को समर्थन से इंकार करते हैं तो सरकार डगमगाती रहेगी क्योंकि निर्दलीय विधायकों पर ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता। कोई भी निर्दलीय विधायक कभी भी सरकार को अलविदा कह सकता है। दूसरी तरफ, इनेलो-अकाली दल गठजोड़ की 32 सीटें है। बीजेपी भी इनके साथ आ जाए तो आंकड़ा 36 तक हो जाता है। पर अगर हजकां के छह विधायक इनेलो को समर्थन दे दें तो इनेलो के लिए दो-तीन निर्दलीय विधायकों का जुगाड़ करना कोई मुश्किल नहीं होगी। हजकां मंगलवार रात या कल तड़के विधायक दल की बैठक करने वाली है। केवल एक दिन का सत्र : नई सरकार के गठन के बाद कल से विधानसभा सत्र शुरू होगा। विधानसभा के कार्यक्रम के अनुसार केवल एक दिन का सत्र है पर बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी ) इस पर अंतिम फैसला लेगी। इनेलो इस बात का विरोध करेगी कि सत्र केवल एक दिन का क्यों रखा गया है। पहला सत्र सुबह साढे़ नौ बजे होगा जिसमें प्रोटेम स्पीकर सभी विधायकों को हल्फ दिलवाएंगे। इसके बाद स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चयन होगा। दूसरे सत्र में राज्यपाल का अभिभाषण और उस पर बहस होगी। इस बीच दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी। बहुत सी नई बातें नजर आएंगी नए सदन में : इस सत्र में सदन में कई नई बातें दिखाई देंगी। मुख्यमंत्री हुड्डा दोबारा सदन के नेता होंगे। ऐसा 1972 के बाद दूसरी बार हुआ है। ओमप्रकाश चौटाला इस बार 32 सीटें हासिल करके तेवर में दिखाई देंगे। इनेलो महासचिव अजय सिंह चौटाला विधानसभा में पहली बार ही आएंगे। हजकां के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई दूसरी बार विधायक के रूप में शपथ लेंगे। पर कुलदीप के पिता पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल इस बार विधानसभा में नहीं होंगे। प्रो. संपत सिंह अपने जीवनकाल में पहली बार कांग्रेस के विधायक के रूप में होंगे और चौटाला का विरोध करते नजर आएंगे। प्रो. बीरेंद्र सिंह और करण सिंह दलाल सरीखे तेज-तर्रार विधायक विधानसभा से नदारद होंगे। दलाल 1991 से लगातार इस विधानसभा के सदस्य रहे हैं। प्रोटेम स्पीकर कैप्टन अजय सिंह यादव लगातार छठी बार सदन के सदस्य होंगे।



शांति..शांति..शांति..!
जिस सुबह के कभी तो आने का इंतजार साहिर लुधियानवी को रहा है, उसी की आस शांति की सुबह के रूप में विश्व के चार नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं को भी है। और शांति व अहिंसा के लिए उठे ये चार महान सुर एक देश के नहीं हैं पर इन्हें दर्द और संवेदना का संबंध जोड़ रहा है। ईरान की पहली महिला जज और नोबेल लॉरिएट शिरिन ईबादी, नार्दर्न आयरलैंड की मेरिड कोरिगन मैग्वायर और अमेरिका की जोडी विलियम्स तिब्बतियों के निर्वासन पर संवेदनशील हुई होंगी तभी तो मैक्लोडगंज पहुंचीं और शांति का संदेश दिया। आखिर यह घर भी तो एक अन्य नोबेल लॉरिएट दलाईलामा का है। मैक्लोडगंज के तिब्बतियन चिल्ड्रन विलेज में मंगलवार को चारों नोबेल विजेता पीस जैम यूथ क्रांफ्रेस के बहाने जुटे तो पूरी दुनिया को शांति का संदेश गया। जोडी विलियम्स ने कहा कि नेतृत्व का अर्थ आर्थिक रूप से शक्तिशाली होना नहीं, मानवता की सेवा करना है। सभी देशों के शासक इस बात का सबसे अधिक ध्यान रखें तभी विश्वभर में शांति स्थापित हो सकती है। उन्होंने कहा कि तिब्बत का मसला गंभीर है तथा इसको लेकर चीन को सकारात्मक कदम उठाकर इस सारे मसले का हल करना चाहिए। इसके अलावा दुनिया के कई हिस्सों में चल रही हिंसा को रोकने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए ताकि विश्व में शांति स्थापित हो सके। नार्दन आयरलैंड से मेरिड कोरिगेन मैग्वायर व ईरान से शिरिन ईबादी ने कहा कि तिब्बत के लोग काफी समय से निर्वासन का जीवन व्यतीत कर रहे हैं फिर अपनी संस्कृति को सहेजे हुए हैं जो बड़ी बात है। विश्व में बढ़ रही हिंसा गंभीर बनती जा रही है जिसे रोकने के लिए सभी को कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि तिब्बत मसले को लेकर चीन को गंभीरता से बात करनी चाहिए तथा इस मसले का हल निकाला जाना चाहिए। इसके अलावा तिब्बत में मानवाधिकारों का भी पूरा ध्यान रखना जाना चाहिए। दलाईलामा ने कहा कि 21वीं शताब्दी में पूरी दुनिया में कई तरह के बदलाव हो रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बदलाव और बढ़ेगा, लेकिन एक समय ऐसा भी आएगा जब पूरी दुनिया में प्यार व शांति का प्रकाश फैलेगा। हिंसा से कभी भी शांति नहीं हुई है। अगर पिछले इतिहास को देखें तो कुछ दशकों में ही पूरी दुनिया में हिंसा से करीब दो करोड़ लोगों की जान जा चुकी है। उसके बावजूद भी कोई सही परिणाम निकलकर सामने नहीं आया है। ताकि विश्व और .. का संदेश दिया गया वहीं, इसके माध्यम से तिब्बती लोगों की पीड़ा को भी उजागर कर तिब्बत की आजादी के लिए 50 साल से जारी अभियान की अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाने का प्रयास किया गया। तिब्बती युवाओं को भी दलाईलामा ने इस आंदोलन में अपनाई जा रही प्यार, शांति व स्नेह की शिक्षा पर ही आगे चलने का संदेश दिया।

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