Posted in November 17, 2009
by arun singla


ताऊ के रास्ते दिल तक जाएंगे हुड्डा
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल भले ही धुर राजनीतिक विरोधी रहे हों लेकिन लगता है कि हुड्डा भी कभी न कभी ताऊ के जनसंपर्क स्टाइल के कायल रहे हैं। तभी तो आज हुड्डा का कारवां मदीना जाते हुए रोहतक के गांव बहुअकबरपुर में सड़क किनारे टेंट लगा देख अचानक ठहर गया। हुड्डा न केवल अपने वाहन से उतरे बल्कि टेंट लगे घर में भी गए। वहां जाकर हुड्डा को पता चला कि इस घर की महिला हुकमो देवी का देहावसान हो गया है। हुड्डा ने शोकाकुल परिवार के दुख में शरीक होते हुए हुकमो देवी को श्रद्धांजलि दी तथा पूरे परिवार को ढांढस बंधाया। पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल भी अपने कार्यकाल में कुछ ऐसा ही करते थे। उनका काफिला अचानक कहीं भी रुक जाता था और ताऊ लोगों के बीच बैठकर उनके सुख-दुख में शरीक होते। मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने भी आज कुछ ऐसा ही किया। मुख्यमंत्री को अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गांव मदीना में आनंद सिंह दांगी के निवास पर जाना था। वहां आनंद सिंह दांगी की भाभी रुकमणी देवी का निधन हो गया है। जब हुड्डा का काफिला रोहतक से मदीना के लिए रवाना हुआ तो गांव बहुअकबरपुर में बाई ओर सड़क के किनारे लगे टेंट को देखकर हुड्डा ने अपनी गाड़ी रुकवाई और वे तुरंत उस घर में पहुंच गए। जहां शोक सभा हो रही थी। मुख्यमंत्री की अचानक उपस्थिति को देखकर ग्रामीण आश्चर्यचकित रह गए। आज भूपी ने लोगों के बीच अचानक पहुंचकर न केवल ताऊ की यादें ताजा कर दी हैं बल्कि अपने सामाजिक होने का अहसास भी कराया है। मुख्यमंत्री ने मदीना पहुंचकर महम के विधायक आनंद सिंह दांगी की भाभी के निधन पर भी दुख व्यक्त किया।

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Posted in November 11, 2009
by arun singla


जिनके इरादे बुलंद, वो जख्म नहीं देखते
23 दिसंबर, 1995 को हुए डबवाली अग्निकांड में पांचवीं क्लास का एक छात्र साहिल सेठी का शरीर पचास प्रतिशत से ज्यादा जल गया था। उसके साथ में उसकी बहन भी इस हादसे का शिकार बन गई थी। साहिल ने फिर भी हार न मानते हुए अपनी अपंगता व आर्थिक परेशानी को बाधा न बनने देते हुए अपने पक्के इरादे के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। मेहनत के बल पर पहले बीटेक पास की और बाद में एमबीए की पढ़ाई के लिए कैट की परीक्षा पास की। डबवाली अग्निकांड पीडि़त एसोसिएशन के प्रवक्ता व साहिल के दादा ने बताया कि साहिल को एक साथ छह आईआईएम से दाखिले की काल आई, लेकिन साहिल ने आईआईएम अहमदाबाद को चुना। उसके अनुसार वह जिले में पहला लड़का है, जिसका दाखिला आईआईएम में हुआ है। किसकी क्या हिस्सेदारी तय की गर्ग कमीशन ने : हाईकोर्ट के आदेश पर बनें जस्टिस टीपी गर्ग कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में मुआवजा की राशि का अस्सी प्रतिशत हिस्सा डीएवी ग्रुप, दस प्रतिशत डीसी सिरसा व पांच-पांच प्रतिशत एमसी व बिजली बोर्ड से लेने की सिफारिश की थी। कमीशन ने इस कांड से प्रभावित लोगों को उनकी उम्र व उनके आय के हिसाब से मुआवजा देने की सिफारिश भी की थी। एक-एक लाख का मुआवजा दे चुकी है हरियाणा सरकार : हरियाणा सरकार ने उस समय प्रत्येक मृतक के परिवार को एक-एक लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल होने वाले लोगों को 50-50 हजार रुपये अनुदान के रूप में दिए थे। अदालत के आदेशों पर घायलों के उपचार पर होने वाला खर्च भी सरकार ने उठाया गया था।

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by arun singla



14 साल पहले हुए डबवाली अग्निकांड के पीडि़तों के लिए सोमवार खुशियां लेकर आया। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की खंडपीठ ने डबवाली अग्निकांड से पीडि़त लोगों का मुआवजा तय करते हुए हरियाणा सरकार को चार माह के भीतर भुगतान का आदेश दिया। फैसले में कहा गया कि कुल मुआवजा राशि का 45 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा सरकार देगी जबकि 55 प्रतिशत राजीव मैरिज पैलेस व डीएवी ग्रुप देगा। हरियाणा सरकार के हिस्से में 15 प्रतिशत नगर परिषद डबवाली, 15 प्रतिशत बिजली बोर्ड व 15 प्रतिशत उस समय के उपायुक्त एमपी बदलान को देना होगा। हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में हरियाणा सरकार को मुआवजे के अतिरिक्त पीडि़त लोगों को मुकदमा राशि का भुगतान करने का भी आदेश दिया। अगर चार माह के भीतर मुआवजे की राशि नहीं दी जाती है तो यह कोर्ट की अवमानना होगी और सरकार को राशि पर दस प्रतिशत ब्याज देना होगा। हाईकोर्ट ने यह मुआवजा राशि जून, 2003 की तारीख से तय की है। हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त कमीशन ने इस हादसे में मारे गए लोगों के लिए आयु व उनकी आय के हिसाब से अलग-अलग श्रेणी में मुआवजा तय किया था, जिस पर पीडि़त लोगों ने आपत्ति दर्ज की थी। पीजीआई और एम्स में होगा मुफ्त इलाज : इस हादसे में जो लोग पीडि़त हैं, अगर राज्य सरकार के अस्पताल में उनके इलाज की सुविधा नहीं है तो पीजीआई और एम्स में उनका मुफ्त इलाज करवाया जाए। क्या था डबवाली अग्निकांड : डबवाली के डीएवी पब्लिक स्कूल के वार्षिक समारोह, जो राजीव मैरिज पैलेस में 23 दिसंबर 1995 को हो रहा था, को भयंकर आग ने अपनी चपेट में ले लिया था। परिणामस्वरूप स्कूली बच्चों, टीचरों, अभिभावकों आदि में से कुल 446 लोगों की मृत्यु हो गई थी और लगभग 200 लोग झुलस गए थे या घायल हुए थे।

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Posted in November 06, 2009
by arun singla


कैंटर-ट्रैक्टर की भिडंत में सात की मौत
( Arun Singla)- मंगलवार रात डेरा सच्चा सौदा सिरसा से पंजाब के फरीदकोट की ओर जा रहा डेरा प्रेमियों से भरा कैंटर गांव चोरमार के पास टै्रक्टर-ट्राली से जा टकरा गया। इससे दो महिलाओं व दो बच्चों सहित सात लोगों की मौत हो गई। इनके अलावा करीब 40 श्रद्धालु घायल हो गए। इनमें अधिकतर बच्चे व महिलाएं हैं। घायलों में से आठ की हालत गंभीर है। घायलों को सिरसा व ओढ़ां के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कैंटर व ट्रैक्टर के परखचे उड़ गए। मंगलवार रात को लगभग 50 डेरा प्रेमी वार्षिक समारोह में भाग लेकर कैंटर से पंजाब के फरीदकोट की ओर जा रहे थे। डबवाली के नजदीक चोरमार के पास कैंटर टैक्टर-ट्राली से टकरा गया। टक्कर होने से कैंटर पलट गया और अधिकतर श्रद्धालु नीचे दब गए। एक महिला की मौत मौके पर ही हो गई व छह लोगों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। आठ लोगों की हालत गंभीर बताई जाती है। घायलों में ज्यादातर बच्चे व महिलाएं हैं। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों व पुलिस ने बचाव दल ने घायलों को निकाला व ओढ़ा व डबवाली के अस्पतालों में पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल आठ श्रद्धालुओं को सिरसा के सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसडीएम सुभाष गाबा, डीएसपी बलबीर सिंह व एसएचओ विजेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंच कर स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। 23 घायलों को ओढां व कुछ को सिरसा के स्थानीय अस्पताल में भर्ती किया गया है। हर ओर थी चीख पुकार हादसे के बाद हर ओर चीख पुकार मची थी। एक ओर घायल पीड़ा से कराह रहे थे और दूसरी ओर अपनों को खोने वाले संताप कर रहे थे। बचाव कर्मी व ग्रामीण घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने में जुटे थे। ओढां के अस्पताल में एक के बाद एक घायल पहुंचने लगे तो वहां भी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में घायलों को भर्ती किया और तुरंत उन्हें चिकित्सा सहायता दी गई। हर कोई अपने अपनों को ढूंढ रहा था। बाद में गंभीर रूप से घायलों को लेकर बस सिरसा पहुंची और जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। सिरसा में दस घायलों को भर्ती कराया गया है। इनमें चार महिलाएं और दो बच्चे हैं।

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Posted in November 03, 2009
by arun singla

खराब फैसले ने सचिन को 17 हजारी बनने से रोका


नई दिल्ली ।। सोमवार को सभी क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें सचिन तेंडुलकर पर लगी हुई थीं। मास्टर ब्लास्टर को वन डे में 17000 रन पूरे करने के लिए सिर्फ 47 रन की जरूरत थी। जब भारत मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे वन डे में 251 रन के लक्ष्य का पीछा करने मैदान में उतरा तो सभी को उम्मीद थी कि सचिन इस मैच में ही 17000 रन पूरे कर लेंगे। सचिन भी जमकर बैटिंग करते हुए आगे बढ़ते रहे और इसी के साथ स्टेडियम में बैठे हजारों और टेलिविजन से चिपके करोड़ों फैन्स की उम्मीदें भी बढ़ती गईं। सचिन 40 रन तक पहुंच गए और लोग सांसें रोक कर उनके 47 रन तक पहुंचने का इंतजार करने लगे, लेकिन तभी श्रीलंकाई अंपायर अशोक डिसिल्वा के गलत फैसले ने सचिन के साथ साथ सभी की निराश कर दिया। डिसिल्वा ने सचिन को ऑफ स्पिनर नाथन हॉरिट्ज की बॉल पर एलबीडब्ल्यू आउट दे दिया, जबकि रीप्ले में साफ था कि वह बॉल लेग स्टंप के बाहर जा रही थी। बॉल मिडिल स्टंप पर पड़ कर लेग की तरफ टर्न हुई थी। पता नहीं डिसिल्वा को यह सब क्यों नहीं दिखा। अब क्रिकेट प्रेमियों को सचिन के 17000 रन के लिए हैदराबाद में होने वाले पांचवें वन डे तक इंतजार करना होगा। 1989 में पाकिस्तान में इंटरनैशनल क्रिकेट में कदम रखने वाले सचिन ने अब तक वन डे में 16993 रन बनाए हैं। इनमें 44 सेंचुरी और 91 हाफ सेंचुरी शामिल हैं। उन्होंने 159 टेस्ट मैचों में 42 सेंचुरी और 53 हाफ सेंचुरी समेत 12773 रन बनाए हैं।

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