ajay choutala jeet ke baad

Posted in October 24, 2009
by arun singla

Gernel Secetary of Inld Ajay Choutala Feel Very Happy After Wining From Dabwali Seat.
Ajay Choutala Defeats His Uncle With Large Margin of 12108votes.
Inld Workers Are Also Very Happy After the Victory of Ajay choutla. Workers
Distributes Sweets And Feels Like A Festival In Dabwali After The Victory Of Ajay Choutala.
Ajay Choutala Says People Give Mendidate Against Congress

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Dabwali news

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by arun singla

विधायकी नहीं रही तो पान की दुकान ही सही
कभी चाय की दुकान उनके परिवार की जीविका का साधन हुआ करती थी और अब पान की दुकान से होने वाली आय पर उनका परिवार निर्भर है। वैसे तो न जाने कितने परिवार चाय और पान की दुकान से होने वाली आय पर पर जीते हैं लेकिन जब बात किसी एक पूर्व विधायक की हो तो चौंकना लाजिमी है। जी हां, लखनऊ में एक ऐसे पूर्व विधायक हैं, जिनका परिवार एक पान की दुकान से होने वाली आय पर चल रहा है। पूर्व विधायक हैं चौधरी तारा चंद्र सोनकर। वह 1985 में लखनऊ जिले की मोहनलालगंज विधानसभा सीट से विधायक हुए थे। हाल के वर्षो में राजनीति में जो बदलाव आया, उसमें विधायक तो बड़ी बात किसी स्थानीय निकाय का एक बार सभासद निर्वाचित हो जाने के बाद उसके परिवार की पूरी जीवन शैली में बदलाव आ जाता है लेकिन तारा चंद्र सोनकर जैसे बिरले ही हैं जो पांच साल विधायक रहने के बाद भी अपने परिवार को जिंदा रखने के लिए चाय या पान की दुकान पर निर्भर रहना पड़ता है। विधायक बनने से पहले भी तारा चंद्र सोनकर लखनऊ के बर्लिंग्टन चौराहे से उदयगंज जाने वाली सड़क पर एक किनारे चाय की छोटी सी दुकान से अपने परिवार को पाला करते थे। तीन बेटों व पांच बेटियों की परवरिश भी उन्होंने चाय बेचकर की। कांग्रेस से उनका पुराना जुड़ाव था। 1985 में मोहनलालगंज से उन्हें चुनाव लड़ने का टिकट मिला और पहली बार में ही उन्होंने जीत दर्ज कर ली। कार्यकाल खत्म होने के बाद उनका जीवन फिर अपने होटल के इर्दगिर्द ही सिमट गया। बेटों के रोजगार की कोई मुकम्मल व्यवस्था न होने और चाय की दुकान में मंदी छाने से उन्होंने पान की दुकान खोल ली। बेटे बिल्लू सोनकर ने पान की दुकान तो जरूर संभाली, लेकिन चौधरी ताराचंद सोनकर भी दुकान पर सुबह दस से शाम पांच बजे तक समय देने लगे। इस दौरान बतौर पूर्व विधायक क्षेत्र के लोग अगर अपनी किसी समस्या को लेकर उनके पास आ जाते हैं तो उसे भी वह सुनते हैं और पूरी कोशिश उसके निदान के लिए करते हैं। छितवापुर के मूल निवासी ताराचंद के पास एक मोटर सायकिल है, जो बेटा चलाता है।









डालरों की खनक ने पंजाब में रिश्तों को खोखला कर दिया है। सगे भाई-बहन भी दूल्हा-दुल्हन बन जाएंतो इसे क्या कहें। मोगा जिले के सैदोके गांव के एनआरआई जसवीर सिंह की हत्या उसकी प्रेमिका अमनपाल कौर ने अपने भाई से इंद्रजीत सिंह से करवा दी। उसी भाई को वह अपना दूल्हा बनाकर विदेश ले गई। बकौल पुलिस, जसवीर की हत्या उसी की प्रेमिका अमनपाल ने करवाई थी। उसने इंद्रजीत उर्फ गुरसेवक सिंह और उसके साथियों के माध्यम से इस वारदात को अंजाम दिलवाया था। इसी तरह कुछ समय पहले मोगा जिले के किल्ली चाहला गांव के हरप्रीत सिंह ने आस्ट्रेलिया में बसने के लिए अपनी मौसेरी बहन से ही कोर्ट मैरिज कर ली। बताया जाता है कि बरनाला निवासी युवक की मौसेरी बहन ने आईलेट्स का टेस्ट पास कर लिया था। वह आगे की पढ़ाई के लिए आस्ट्रेलिया जा रही थी। वह किसी को अपना पति बनाकर ले जा सकती थी। इससे उसे पैसे भी मिल जाते। फिर क्या था। इस मौके का लाभ उठाने के लिए उसने रिश्ते को दांव पर लगा दिया। पंजाब के शहर-देहात में ऐसे कई और मामले पुलिस की फाइलों में हैं। रिश्तों को दांव पर लगाने के अलावा विदेश जाने की चाह में कई लोग नकली प्रापर्टी पेपर व इनकम टैक्स रिटर्न बनवाकर विजिटर वीजा लगवा रहे हैं। ट्रैवल एजेंटों के दफ्तरों के बाहर हर रोज विदेश जाने के इच्छुक लोगों की लाइन लगी रहती है। एसएसपी अशोक बाठ कहते हैं कि बेरोजगारी और कम वक्त में अधिक रुपये कमाने की होड़ ने लोगों की सोच को बदलकर रख दिया है। लोगों में एनआरआई का तमगा लगाने का जुनून सवार है। इसके लिए रिश्तों को ताक पर रखना शर्मनाक है। समाजशास्त्री आरके महाजन मानते हैं कि यह ट्रेंड देश की संस्कृति के लिए घातक है। विदेश में बसने के लिए ऐसा फंडा ट्रैवल एजेंटों की देन है।









कुंवारी को विवाहिता व तिनके को बताया आशियाना
बेगूसराय जिले के लड़ुआरा पंचायत के बीड़ी मजदूरों के लिये श्रम एवं नियोजन विभाग के मंत्रालय द्वारा आवंटित 129 इंदिरा आवास के मामले में पंचायत सचिव द्वारा व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरते जाने का मामला प्रकाश में आया है। बीडीओ ने आवंटित 129 आवासों के लिए पंचायत सचिव को यह जांचने का आदेश दिया कि सूचीबद्ध बीड़ी मजदूरों ने पूर्व से आवास का लाभ लिया है या नहीं। इसी आदेश के आलोक में पंचायत सचिव ने जांच रिपोर्ट सौंपी जिसमें कई चौंकाने वाले आंकड़े मिले हैं। प्रतिवेदन में कई बेघरों व जीर्ण-शीर्ण झोपड़ी वालों को भी पक्का भवन होने की बात कही है। इस बाबत बीड़ी मजदूरों ने बताया कि पंचायत सचिव के प्रतिवेदन के क्रमांक 3 में श्रीमती अख्तरी खातून को पक्का मकान दर्शाया गया है जबकि उसके पास जीर्ण-शीर्ण झोपड़ी है। क्रमांक 10 में मो. सरवर की पत्‍‌नी रौशन खातून को पक्का भवन दर्शाया है जबकि उसके पास भी झोपड़ी है। क्रमांक 13 मो. अफजल की पुत्री गजाला परवीन को शादीशुदा ससुराल हर्रख बताया गया है जबकि गजाला की अब तक शादी ही नहीं हुई। क्रमांक 20 मो. मोकर्रम की पत्‍‌नी नसीमा खातून को पक्का मकान दर्शाया गया है। जबकि वह बेघर है और अपने चाचा के जीर्ण-शीर्ण खपड़ैल मकान में गुजर-बसर कर रही है। क्रमांक 58 में मो. नसीम की पत्‍‌नी शबाना खातून को पक्का घर दर्शाया गया है जबकि वह बेघर है और बहनोई के घर में रहती है। क्रमांक 57 में मो. अताउल्लाह की पत्‍‌नी श्रीमती शबनम को पक्का मकान दर्शाया गया है। जबकि उसके पास जीर्ण-शीर्ण झोपड़ी है। क्रमांक 76 में मो. वकील की पत्‍‌नी हसरून निशां को पक्का भवन दर्शाया गया है जबकि उसके पास टूटी झोपड़ी है। क्रमांक 93 में मो. ऐनुल हक को पंचायत शिक्षक दर्शाया गया है। जबकि वह बीड़ी मजदूर है। बीड़ी मजदूरों का आरोप है कि पंचायत सचिव के पत्रांक सं.11 को 27.08.09 में बीडीओ को सौंपा गया प्रतिवेदन झूठ का पुलिंदा है। वास्तविक लाभुकों को आवास की सुविधा से वंचित करने के लिये पंचायत सचिव ने अनियमितता बरती है। इस संबंध में पूछे जाने पर सदर प्रखंड के बीडीओ प्रमोद कुमार ने कहा प्रतिवेदन की स्थलीय जांच में दोषी पाये जाने पर पंचायत सचिव के विरुद्ध विधि सम्मत विभागीय कार्रवाई की जायेगी। इस गड़बड़ी की चर्चा सरेआम होने पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है। इधर जदयू के जिलाध्यक्ष भोला कांत झा के नेतृत्व में एक जांच टीम बनायी गयी। टीम ने गुरुवार को लड़ुआरा का दौरा कर जायजा लिया। इसमें वर्णित आरोपों को सत्य पाया गया है। उसने पंचायत सचिव द्वारा बीडीओ को सौंपे जांच प्रतिवेदन सोची-समझी साजिश के तहत झूठ का पुलिंदा करार दिया है। जांच दल में शामिल जदयू जिलाध्यक्ष भोलाकांत झा, आजाद बीड़ी मजदूर यूनियन के प्रदेश महासचिव मो. एहतेशामुल हक अंसारी, कार्यकारिणी सदस्य अनिरूद्ध पासवान, लड़ुआड़ा पंचायत के सरपंच नीरज पटेल मो. आजाद, सुरेश कुमार झा ने जिलाधिकारी जितेन्द्र श्रीवास्तव को आवेदन देकर जांच कर पंचायत सचिव के निलंबन की मांग की है तथा सभी 129 बीड़ी मजदूरों को इंदिरा आवास देने का अनुरोध किया है।
खुफिया विभाग की साइकिल पर सवारी
कंप्यूटर के युग में भी पंजाब पुलिस का खुफिया विभाग पुराने ढर्रे पर ही काम कर रहा है। खुफिया विभाग आज भी जानकारी जुटाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करता है। इसके लिए बकायदा खुफिया विभाग के मुलाजिमों को बीस रुपये प्रति माह साइकिल एलाउंस भी दिया जाता है। सरकार की ओर से दिया जाने वाला बीस रुपये का साइकिल एलाउंस विभाग की कार्यप्रणाली और खुफिया मुलाजिमों की क्षमता पर कई तरह के सवाल खड़े करता है। इतना ही नहीं खुफिया विभाग के जवानों को 25 रुपये प्रतिमाह किट मेन्टेनेंस और 100 रुपये प्रति माह राशन मनी के नाम पर दिए जाते हैं, जो कमरतोड़ मंहगाई के दौर में मजाक सा है। 24 घंटे ड्यूटी करने वाले विभाग के इन जवानों का स्केल दिन में छह घंटे ड्यूटी करने वाले जेबीटी अथवा बीएड अध्यापक से भी कम है। हालांकि इन जवानों को कई बार वेतन आयोग द्वारा अध्यापकों के वेतनमान के बराबर लाने की भी कोशिश की गई। पंजाब विधानसभा में सबसे पहले खुफिया विभाग के कर्मचारियों के हक में सवाल रिटायर डीएसपी नरोट मेहरा व विधायक विशंभर दास ने उठाया था। मगर अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। विधायक दास का कहना है कि आज जिस तरह से आतंकियों व अपराधियों से चुनौती मिल रही है, उसके लिए खुफिया विभाग को मजबूत व कर्मचारियों को उत्साहित करने की जरूरत है। आईजी हेडक्वार्टर पराग जैन भी मानते है कि आज युवा पीढ़ी को इस क्षेत्र में आने के लिए उत्साहित किए जाने की जरूरत है। जल्द ही पंजाब में कम्यूनिटी ओरिएंटेड पुलिस बनाई जा रही है। इसके अलावा जवानों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग उनके वेलफेयर और उनको ऊंचा उठाने के लिए विभिन्न प्रोग्राम बनाए गए हैं, जो सरकार के साथ विचार विमर्श के बाद लागू कर दिए जाएंगे। आईजी जोनल संजीव कालड़ा ने भी माना कि लंबे अरसे से इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया है। पुलिस मुलाजिमों और खुफिया विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर जितना काम का बोझ है उस हिसाब से न तो उनके पास सुविधाएं है और न ही उन्हें मेहनत का पूरा फल मिल रहा है। हालांकि उन्होंने विभाग की तरफ से सरकार को कुछ सुझाव दिए थे। इस संबंध में एक वेलफेयर बैठक इस माह के अंत या अगले माह के शुरू में आयोजित की जाएगी। बैठक में कुछ अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार इन सुझावों पर अमल करते हुए कर्मचारियों की दिक्कतों को दूर करने की कोशिश करेगी।
पाक आतंकियों से बचाए परमाणु अस्त्र : भारत
नई दिल्ली: पाकिस्तान में हर रोज हो रहे आतंकी हमलों के मद्देनजर भारत ने विश्व समुदाय का ध्यान वहां मौजूद परमाणु अस्त्रों पर मंडरा रहे खतरों की तरफ दिलाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव निरुपमा राव ने कहा कि परमाणु हथियार पाक में सक्रिय आतंकियों के पहुंच से दूर रखने की जरूरत हैं। उन्होंने मुंबई हमलों के दोषियों पर कार्रवाई को लेकर पाक के धीमे पड़ने पर भी निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि पाक के इस रवैये के पर भारत ने अपनी राय इस्लामाबाद को बता दी है। विदेश सचिव का इशारा सीधे तौर पर यही था कि किसी एक घटना के लिए जिम्मेवार आतंकियों पर नरमी बरतने का ही खामियाजा है कि उसके अपने घर में भी लगातार हमले हो रहे हैं।
पाक के परमाणु ठिकानों तक पहुंच गए आतंकी
इस्लामाबाद: संदिग्ध तालिबान आतंकियों ने पाकिस्तान में फिर खूनी खेल खेला। आतंकियों ने शुक्रवार को एक के बाद एक देशभर में तीन बड़े हमले किए। इनमें से एक हमला तो कामरा वायुसेना ठिकाने पर बोला गया। इसे पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा अहम ठिकाना माना जाता है। आतंकियों ने बारात ले जा रही बस को उड़ा दिया। एक रेस्तरां के बाहर भी धमाका किया गया। इन हमलों में 26 लोगों की जान चली गई। कई दर्जन लोग जख्मी भी हुए हैं। आतंकियों ने जुमे के दिन पहला हमला पंजाब प्रांत में पाकिस्तानी वायुसेना के कामरा ठिकाने पर बोला। साइकिल सवार आत्मघाती हमलावर ने सुबह सबेरे इस ठिकाने की एक चेक पोस्ट पर खुद को धमाके से उड़ा लिया। जोरदार धमाके की चपेट में आए आठ लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इनमें से दो वायुसेना के सुरक्षागार्ड थे। इस हमले में करीब डेढ़ दर्जन लोग जख्मी भी हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावर की उम्र 20 से 25 साल के बीच थी। सुरक्षा गार्डो ने जैसे ही उसे रोका उसने अपनी सुसाइड जैकेट में धमाका कर दिया। पुलिस का कहना है कि उसकी जैकेट में तबाही मचाने का करीब पांच किलोग्राम सामान भरा था। अमेरिका के सामरिक थिंक टैंक स्ट्रेटफोर के मुताबिक कामरा ठिकाने पर हमले से पाक के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर फिर आशंकाएं उभर सकती हैं। कामरा पाक की वायुसेना का सबसे बड़ा रखरखाव और शोध प्रतिष्ठान बताया जाता है। यह भी कहा जा रहा है कि परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम जंगी विमान भी इस ठिकाने पर ही रखे गए हैं।

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सोनिया चुनेंगी मुख्यमंत्री

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by arun singla

हरियाणा कांग्रेस विधायक दल का नेता कौन होगा, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी यह तय करेंगी। और जिस नेता को सोनिया चुनेंगी, उसी के सिर पर सजेगा मुख्यमंत्री का ताज। हरियाणा कांग्रेस विधायक दल ने आज शुक्रवार को बैठक कर विधायक दल का नेता चुनने के लिए कांग्रेस आला कमान को तमाम हक दे दिए। इस संबंध में कल दिल्ली में हरियाणा से कांग्रेसी सांसदों की राय भी ली जाएगी। बहुत मुमकिन है कि कल ही सोनिया कांग्रेस विधायक दल के नेता के नाम पर अपनी मुहर लगा देंगी। वर्ष 2005 में भी सरकार बनाने के वक्त विधायक दल ने सभी अधिकार सोनिया गांधी को दे दिए थे पर तब सांसदों से यहीं राय ले ली गई थी। बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से तीन पर्यवेक्षक पृथ्वीराज चव्हान, बी हरिप्रसाद और मोहसिना किदवई मौजूद थीं। बैठक में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित सभी 40 विधायक शामिल हुए जबकि जबकि तीन सांसद केंद्रीय मंत्री सैलजा, डा. अरविंद शर्मा और अवतार सिंह भडाना बैठक में नहीं आए। बैठक में शामिल होने वाले सांसदों में दीपेंद्र सिंह हु़ड्डा, जितेंद्र मलिक, श्रुति चौधरी, अशोक तंवर, राव इंद्रजीत और नवीन जिंदल शामिल हैं। कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद तीनों पर्यवेक्षकों ने सभी विधायकों से अलग-अलग राय जानी कि वे किसे विधायक दल का नेता बनाना चाहते हैं। विधायकों से कुछ अन्य मुद्दों पर भी राय ली गई। बैठक में चर्चा व उसके बाद विधायकों से राय से तीनों पर्यवेक्षक कांग्रेस हाईकमान को अवगत कराएंगे जिसके आधार पर फैसला लिया जाना है।

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नई दिल्ली।। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर रविवार को जब वड़ोदरा में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सात मैचों की वनडे सीरीज की शुरुआत करेंगे, तो उनके निशाने पर वनडे क्रिकेट में 17,000 रन के अलावा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 30,000 रन का जादुई आंकड़ा भी होगा। तेंडुलकर ने अब तक 159 टेस्ट की 261 पारियों में 42 शतक और 53 अर्धशतक की मदद से 54-58 की औसत के साथ 12773 रन बनाए हैं। जबकि 430 वनडे मैचों में उनके नाम 44-48 की औतस से 16903 रन दर्ज हैं। इसमें 44 शतक और 91 अर्धशतक शामिल हैं। उन्होंने इसके अलावा अपने करिअर में एकमात्र ट्वेंटी 20 अंतरराष्ट्रीय मैच में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 10 रन बनाए हैं। सचिन ने इस तरह कुल 29686 अंतरराष्ट्रीय रन बनाए हैं। 30,000 रन का आंकड़ा छूने के लिए उन्हें 314 रन की दरकार है। जबकि सीरीज में 97 रन बनाते ही वह वनडे मैचों में 17,000 रन का आंकड़ा छू लेंगे। शानदार फॉर्म में चल रहे तेंडुलकर अगर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सात मैचों की सीरीज में अपने करियर की औसत के मुताबिक रन बनाते हैं, तो उन्हें इसी सीरीज के दौरान भारतीय दर्शकों के सामने 30,000 अंतरराष्ट्रीय रन पूरे करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

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Dabwali news

Posted in October 23, 2009
by arun singla

सात निर्दलियों ने हासिल की जीत
हरियाणा राज्य की 12वीं विधानसभा में इस बार सात निर्दलीय विधायक जीतकर आए हैं। पिछली बार के चुनाव में 11 आजाद विधायकों ने जीत हासिल की थी, मगर इस बार निर्दलीय विधायकों की संख्या घटकर सात रह गई है। 67 में सिर्फ नौ महिलाएं ही चुनाव जीतीं चंडीगढ़ : हरियाणा की 12वीं विधानसभा चुनाव में 67 महिलाएं चुनावी समर में मैदान में उतरी थीं, जिनमें मात्र नौ ही चुनाव जीतने में सफल हुई हैं। इनमें कांग्रेस की छह, इनेलो की दो और एक भाजपा की है। हरियाणा में अकालियों का खाता खुला चंडीगढ़ : अकाली दल ने पहली बार पंजाब के बाहर चुनाव जीत कर अपना आधार फैलने के सबूत दिए हैं। यूं तो पार्टी पहले भी दिल्ली आदि राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ती रही है मगर उसे जीत नसीब हुई इस बार हरियाणा के विधानसभा चुनाव में। अकाली प्रत्याशी चरणजीत सिंह ने कालियांवाली सीट जीत कर इनेलो के हाथ मजबूत किए हैं जिसने अकाली दल को राज्य में दो सीटें दी थीं। जीत के बावजूद हजकां प्रत्याशी की जमानत जब्त करनाल : जीत हासिल करने के बावजूद असंध विधानसभा क्षेत्र से हजकां प्रत्याशी पंडित जिलेराम शर्मा अपनी जमानत नहीं बचा पाए। उन्हें जमानत बचाने के लिए निर्धारित वोट नहीं मिले। इस क्षेत्र में कुल एक लाख 28 हजार 218 मत पड़े। प्रत्येक प्रत्याशी को जमानत बचाने के लिए कुल मतों का 1/6 हासिल करना होता है। इस नियम पर जिलेराम शर्मा समेत कोई भी प्रत्याशी खरा नहीं उतरा। जिलेराम को 20 हजार 266 मत मिले हैं।

कुछ यूं दी गई बधाइयां ..
चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में जोश भर गया, लिहाजा उन्होंने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को कुछ इस अंदाजा में बधाइयां दीं।


मेहमानों को सड़कें खूबसूरत दिखाने की तैयारी
विदेशी मेहमानों को सड़कें किस तरह की दिखें, इसके लिए लंबी माथापच्ची के बाद सौंदर्यीकरण की योजना पर जमीन पर उतारने की कवायद शुरू हो गई। खेलों के लिए सड़कों के सौंदर्यीकरण योजना का दिल्ली के पहले प्रोजक्ट का राष्ट्रीय राजमार्ग-24 पर सैंपल तैयार किया गया है। इसमें दस से अधिक प्रजाति के पौधे, बेल व पेड़ लगाए गए हैं। योजना इस प्रकार तैयार की गई है कि इस हरियाली के बाद पूरा इलाका बदला-बदला नजर आएगा। योजना के तहत जो पौधे लगाए गए हैं, वे सभी देशी हंै। लोक निर्माण विभाग के सचिव के.के. शर्मा ने बुधवार शाम दौरा कर गाजियाबाद से निजामुद्दीन की ओर आने वाले मार्ग पर बनाए गए सैंपल को ओके कर दिया है। इसे शीघ्र ही दिल्ली के मुख्य सचिव राकेश मेहता और मुख्यमंत्री शीला को भी दिखाया जाएगा। सरकार से स्वीकृति मिल जाती है तो इसी के अनुरूप इस मार्ग को सुंदर बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। कामनवेल्थ गेम्स के चलते जो रूट खिलाडि़यों को लाने-ले जाने के निर्धारित किए गए हैं, उन्हें सुंदर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी के तहत यमुना खादर में स्थित खेल गांव से यमुना स्पो‌र्ट्स कांप्लैक्स तक के रूट के सौंदर्यीकरण करने के लिए एनएच-24 पर मदर डेयरी पुलिया के पास संजय झील के सामने दोनों मार्गो पर सौ-सौ मीटर के सैंपल बनाए गए हैं। इसके अलावा मार्ग के सेंट्रल वर्ज को विकसित किया जा रहा है। इस पर पिछले 10 दिन से काम चल रहा है। सैंपल दो प्रकार के बनाए गए हैं। इसमें से गाजियाबाद की ओर से निजामुद्दीन की ओर जाने वाले मार्ग पर बने सैंपल को लोक निर्माण विभाग ने स्वीकृति दे दी है। इसमें हाइकस बैंजामीना, हाइकस ब्लैक आई व हाईकस रिजलाल्ट आदि के पेड-पौधे लगाए गए हैं। वे पेड़ लगाए गए हैं, जो छह से सात फुट तक ऊंचे हो जाते हैं। बीच-बीच में लाल फूल देने वाला हिमेलिया तथा पीला बड़ा फूल देने वाला टिकोमा लगाया गया है। यूनीपैंसिस व बैंगू (बांस) के पेड़ लगाए गए हैं। बार्डर के लिए इनर्मी लगाई गई है। जमीन को सुंदर बनाने के लाल घास लगाई गई है। इस रोड से जुड़ने वाले दूसरे मार्ग रोड संख्या-56 को गाजीपुर लालबत्ती से आनंद विहार बस अड्डा जाने वाले मार्ग का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसके लिए एक सप्ताह बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस रोड के लिए अलग तरह के पौधे लगाए जाएंगे।


हुड्डा की राह में खड़ी हुई सैलजा और किरण चौधरी
हरियाणा में कांग्रेस भले ही बहुमत से कुछ पीछे रह गई हो, लेकिन पार्टी के कई नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में आगे निकलने कोशिश में जुट गए हैं। चुनाव नतीजों की घोषणा के साथ ही गुरुवार शाम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा और किरण चौधरी ने अपने-अपने तर्को के साथ पार्टी हाईकमान के यहां हाजिरी लगाई। राज्य में पार्टी के खराब प्रदर्शन का ठीकरा केंद्रीय नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व के सिर फोड़ा है। इसके लिए उसके अति उत्साह को जिम्मेदार बताया गया है। कांग्रेस को उम्मीद से कमजोर चुनाव नतीजों के चलते जहां निर्दलीय व दूसरी पार्टी के समर्थन की तलब है, वहीं उसे हुड्डा के नाम पर सहमति न बनने की भी आशंका है। खासकर हजकां से समर्थन की नौबत आने पर। केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा और बंसीलाल की बहू किरण चौधरी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। सोनिया गांधी से मुलाकात करने गए भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब10 जनपथ से बाहर निकले, ठीक उसी समय सैलजा सोनिया से मिलने गईं। उसके थोड़ी देर बाद किरण चौधरी भी पहुंच गईं। पार्टी महासचिव बीके हरिप्रसाद ने राज्य में वहां के नेतृत्व के अति उत्साह को कोसा। उनका कहना है कि हरियाणा के चुनाव नतीजे पार्टी की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते। हरिप्रसाद ने कहा कि निर्दलीय व हजकां जैसी पार्टियों के पास समर्थन के लिए जाना ही पड़ेगा। ऐसे में उनकी ओर से आई शर्त को नजरअंदाज करना भी संभव नहीं होगा। लोकसभा चुनाव में 10 में नौ सीटें जीतने के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने समय से छह महीने पहले चुनाव कराने के प्रस्ताव पर पार्टी हाईकमान से मुहर लगवा ली। टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार के तौर तरीके की पूरी छूट हुड्डा को मिली थी। चुनाव की कमान भी उनके हाथ में ही थी। प्रदेश कांग्रेस के दूसरे धड़े के नेताओं को नजरअंदाज किया गया। यही वजह थी कि पूरे चुनाव के दौरान ये नेता खिंचे-खिंचे रहे। जाहिर तौर पर अब हुड्डा चौतरफा निशाने पर हैं। प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं में चौधरी विरेंद्र सिंह चुनाव हार गए हैं, जो मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में सबसे आगे थे।


Elections is causing direct impact on routine functioning of Haryana State.
Sirsa: Elections is causing direct impact on routine functioning of Haryana State.The latest report from Sirsa says that university authorities have stayed celebration of the birth anniversary of Shaheed Bhagat Singh on the university campus by students citing violation of the model code of conduct, and asking to organize this event after haryana assembly elections.It is to mention that,All-India Students Federation (AISF) had proponed birth anniversary of Shaheed Bhagat Singh function of September 28, to September 24 due to the Dussehra festival and invited Vice- Chancellor KC Bhardwaj as the chief guest for their programme, named “Ek Sham, Bhagat Singh ke Naam”.


..तो धम्मपद नहीं, गांधी का स्वराज चाहिए
मुझे यदि धम्मपद और गांधी के स्वराज में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जाए तो मैं नि:संकोच स्वराज को चुनुंगा। तमाम समस्याओं का हल गांधी के दर्शन में ही है..आवश्यकता है इसे आत्मसात करने की..। यह कहना है बौद्ध संत व दलाईलामा के प्रमुख सहयोगी और तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री सामदोंग रिंपोछे का जो इन दिनों गांधी कथा के प्रचार का जिम्मा उठाए हुए हैं। उनके सरकारी कार्यालय में दैनिक जागरण की उनसे बातचीत तो गांधी कथा पर शुरू हुई, लेकिन संदर्भ स्वराज और अहिंसा के मर्म तक भी पहुंचे। अहिंसा के मूल सिद्धांत पर आधारित बौद्ध धर्म व उसके प्रमुख अनुयायी होने के बावजूद महात्मा गांधी एवं उनके दर्शन के प्रचार की आवश्यकता को स्पष्ट करते हुए उनका कहना है, बुद्ध की अहिंसा धर्म और नीति तक सीमित होकर रह गई। श्रीलंका, कंबोडिया, थाईलैंड एवं बर्मा जैसे बौद्ध राष्ट्र पुलिस और सेना के बिना शासन की कल्पना तक नहीं कर पाए। दूसरी ओर गांधी ने उसे जीवन के हर पहलू, यहां तक कि राजनीति तक में उतार दिया। भारत की आजादी की लड़ाई, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की लड़ाई उन्होंने अहिंसा के बल पर लड़ी और सफल रहे। वही पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सेना और पुलिसविहीन राष्ट्र व स्वराज की कल्पना की। रिंपाछे ने बताया कि बुद्ध और महावीर जैसे महात्माओं के कारण भारत समेत पूरे विश्व में करीब ढाई हजार साल से अहिंसा का उपदेश सुनने को मिल रहा है, लेकिन दुर्भाग्यवश आम लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा नहीं बन पाया। इसे सिर्फ आत्मिक उत्थान व धर्म का तरीका भर माना गया है। इसे दैनिक जीवन में उतारने और इसके माध्यम से अपनी बात मनवाने की ताकत बनाने का श्रेय पूरी तरह से महात्मा गांधी को जाता है। यह दीगर है कि आजादी के बाद उनके सिद्धांतों पर अमल नहीं हो पाया, लेकिन मेरा आज भी दृढ़ विश्वास है कि बिना सेना, पुलिस एवं बल प्रयोग के शासन संभव है। दलाईलामा के सहयोगी रिंपोछे का मानना है कि गांधी के स्वराज को ईमानदारी से अपनाएं तो विश्वव्यापी आतंकवाद, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी एवं मंदी जैसी समस्या का हल इसी में है। यदि पूरा मानव समाज अहिंसा के सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करे और अपनी समस्याओं का हल अहिंसक तरीके से तलाश करे तो स्वत: ही हिंसा, आतंकवाद और लड़ाई-झगड़े खत्म हो जाएंगे। इसी तरह ग्राम स्वराज के सिद्धांत पर चलते हुए वस्तुओं का उतना ही ग्रामीण स्तर पर उत्पादन और संग्रह हो जितनी आवश्यकता है तो मंदी नहीं रहेगी। मौजूदा स्थिति को घातक बताते हुए उनका कहना है कि यह वैश्वीकरण और मशीनीकरण का दौर है। कारखानों में बेतहाशा उत्पादन, अधिक से अधिक वस्तुओं का संग्रह, मुनाफाखोरी, और अपनी आवश्यकता देखे बिना सिर्फ दूसरों को देखकर अस्त्र-शस्त्र समेत तमाम विलासता के सामान खरीदने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। हर आदमी, समाज और राष्ट्र चाहे-अनचाहे इस दौड़ में है। इससे उबरने का एकमात्र रास्ता संस्कारों में परिवर्तन है जो गांधी दर्शन में है।
Cricketer Yuvraj Singh's father loses election
Dabwali, Oct 22 : Former Indian cricketer Yograj Singh, who is the father of cricket star Yuvraj Singh, Thursday lost his maiden election from Haryana's Panchkula assembly seat.Yograj, who was fielded by the Indian National Lok Dal (INLD), was defeated by Congress candidate Devender Kumar Bansal from the Panchkula seat, adjoining state capital Chandigarh, by over 12,250 votes. Yuvraj had not come to campaign for his father, who had put up posters of his celebrity son. At one point Yograj was trailing at fourth place among main candidates but recovered later to end runner-up in the election. Yograj had played one test match and six one day internationals for India against Australia in 1980 during a trip Down-under.


Chautala defeats finance minister by 621 votes
Dabwali, Indian National Lok Dal (INLD) president and former Haryana chief minister Om Prakash Chautala Thursday pulled off a tough win Thursday when he defeated state Finance Minister Birender Singh in the Uchana Kalan assembly seat.Chautala defeated Singh by a margin of just 621 votes on this seat in what is perhaps the biggest contest among all 90 assembly seats in the state. Birender Singh, a powerful Jat community leader from Jind district, was aspiring to be chief minister if the Congress returned to power. Chautala, who contested two assembly seats, was leading from the Ellenabad seat in Sirsa district by over 16,000 votes and was expected to win that comfortably as well.


Akali Dal wins its first assembly seat in Haryana
Dabwali,: Punjab's ruling Shiromani Akali Dal Thursday scored its first electoral win in Haryana with its candidate Charanjeet Singh getting elected from the Kalanwali (reserved) assembly seat.Charanjeet Singh defeated Sushil Kumar Indora of the Congress by over 12,500 votes. This is the first electoral victory for the Akali Dal in Haryana. The Akalis had an electoral alliance with the Indian National Lok Dal (INLD) in the state in this election even though its candidates fought under the Akali Dal symbol. Indora had left the August this year to join the ruling Congress. The only other Akali Dal candidate, Charanjeet Kaur, however, lost the Ambala city assembly seat to Congress candidate and former union minister Venod Sharma by over 35,500 votes.

खुलेआम उल्लंघन, फिर भी नहीं कोई दंड
ऐसा लगता है कि गलती पर सजा की हकदार सिर्फ जनता ही होती है, सरकारी अफसर नहीं। कम से कम सूचना के अधिकार कानून के मामले में तो यह सौ फीसदी सच है। देशभर में जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) के तौर पर काम कर रहे सरकारी अफसरों की सौ में से 98 गलतियां चुपचाप माफ कर दी जाती हैं। इनके खिलाफ सुनवाई करने वाले सूचना आयुक्त इन्हें सिर्फ अपनी गलती सुधार लेने भर को कहते हैं। यह खुलासा सूचना आयुक्तों के फैसलों के एक व्यापक अध्ययन में हुआ है। अध्ययन के मुताबिक केंद्र और राज्यों के मौजूदा सूचना आयुक्त सरकारी अफसरों से इस कानून का पालन करवा पाने में असरदार साबित नहीं हो रहे। इसकी वजह भी ये आयुक्त खुद ही हैं। दरअसल, लगभग सभी मामलों में ये उल्लंघन करने वालों को कोई सजा ही नहीं देते। जन सूचना अधिकारी के तौर पर काम कर रहा अफसर अगर तीस दिन के अंदर मांगी गई सूचना नहीं देता तो कानूनन उस पर हर दिन की देरी के लिए जुर्माना लगना चाहिए। लेकिन जिन मामलों में सूचना आयुक्त यह मान भी लेते हैं कि आवेदनकर्ता सही है और उसे सूचना उपलब्ध करवाई जानी चाहिए, उनमें भी वो उल्लंघन करने वाले अधिकारी को दंडित नहीं करते। देशभर के सूचना आयुक्तों के कामकाज का यह अध्ययन करवाने वाले पब्लिक काज रिसर्च फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी और मैगसेसे पुरस्कार विजेता अरविंद केजरीवाल कहते हैं कि आयुक्त जब यह मान लेते हैं कि आवेदन करने वाला सही है और उसे सूचना मिलनी चाहिए तो फिर जो गलत है, उसे सजा क्यों नहीं मिलती जबकि कानून इसके लिए साफ हिदायत देता है। आयुक्तों के इस लचर रवैये की वजह से ही उनके फैसलों के बाद भी अफसर उसे गंभीरता से नहीं लेते। हालांकि यह अध्ययन रिटायर सरकारी अफसरों को लेकर आपकी धारणा काफी हद तक बदल सकता है। इसके मुताबिक रिटायर्ड अधिकारी सूचना आयुक्त बनने के बाद जरूरी नहीं कि अफसर बिरादरी को बचाने के लिए ही काम करे। अध्ययन में पता चला है कि सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले आयुक्त भी रिटायर्ड नौकरशाह हैं और सबसे बुरा प्रदर्शन करने वाले भी इसी बिरादरी के हैं। छह हजार आरटीआई अपीलकर्ताओं से मिले आंकड़ों के मुताबिक जनसंतोष के मामले में अव्वल रहने वाले केरल के आयुक्त पी फजलुद्दीन और केके मिश्रा भी शीर्षस्थ सरकारी अधिकारी रहे हैं और सबसे कमतर साबित होने वाले सीडी आरा और नवीन कुमार भी।

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