एमसीआई के प्रस्ताव पर विचार कर रही है सरकारगांवों में प्रैक्टिस के लिए अलग डिग्री पर भी विचारनई दिल्ली। केंद्र सरकार एमबीबीएस के बाद तीन साल ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने वाले डाक्टरों के लिए स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश में 25 फीसदी सीटें आरक्षित करने पर विचार कर रही है। भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को यह प्रस्ताव भेजा है। ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा सेवा बेहतर बनाने और डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार कुछ अन्य प्रस्तावों पर भी विचार कर रही है।स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित हो रहेएमसीआई के अध्यक्ष डा. केतन देसाई ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भारी धनराशि खर्च कर रही है लेकिन डाक्टरों की कमी के कारण ज्यादातर प्राइमरी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित हो रहे हैं। इससे निपटने के लिए एमसीआईर् ने कुछ और महत्वपूर्ण सुझाव भेजा है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित मेडिकल कालेजों में साढ़े तीन साल में ही मेडिकल डिग्री देने का प्रस्ताव शामिल है। ग्रामीण मेडिसिन और सर्जरी में बैचलर डिग्री (बीआरएमएस) के लिए छात्रों का चयन बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। शर्त यह भी होगी कि छात्र की स्कूली शिक्षा दस हजार से कम आबादी वाले गांवों में हुई हो।बोर्डों से पंजीकरण करना होगाबीआरएमएस ग्रेजुएट को राज्य मेडिकल बोर्डों से पंजीकरण करना होगा और उन्हें केवल उसी क्षेत्र में प्रैक्टिस की अनुमति दी जाएगी जिसमें उन्होंने शिक्षा ली है। एमसीआई ने इस संबंध में विचार-विमर्श के लिए आगामी 4 और 5 फरवरी को 300 मेडिकल कालेजों के प्रधानाचार्यों, सभी राज्यों के मेडिकल संस्थानों के निदेशकों और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। दरअसल यह प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय को वर्ष 2000 में ही भेजे गए थे लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डाक्टरों की भारी कमी के मद्देनजर मंत्रालय ने अब इन पर विचार करने की सहमति दी है।


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