उत्तर प्रदेश में जाड़े का कहर जारी : कोहरे से यातायात प्रभावितलखनऊ /बिहार/मनाली । उत्तर भारत में शीत लहर का प्रकोप जारी है। श्रीनगर में बर्फबारी के बाद जहां तापमान शून्य से भी नीचे चला गया वहीं राजधानी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश व बिहार में शीतलहर जारी है। यूपी में ३० लोगों की मौत हो चुकी है। लखनऊ स्थित राहत आयुक्त कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार देर रात से अब तक शीतलहर से राज्य में कम से कम ३० लोगों की मौत हो गई है। इनमें सबसे ज्यादा पांच-पांच मौतें पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया और मिर्जापुर जिलों में हुईं। राज्य के कुछ हिस्सों में तापमान गिरकर तीन डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। शाहजहांपुर में सबसे कम २.८ डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया।बलरामपुर, श्रावस्ती और गोंडा जिलों में न्यूनतम तापमान गिरकर करीब तीन डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है, जबकि लखनऊ का न्यूनतम तापमान ८.६ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के निदेशक जेपी गुप्ता ने सोमवार को लखनऊ में संवाददाताओं को बताया कि पर्वतीय क्षेत्रें में हो रही बर्फबारी के कारण वहां से आने वाली हवाएं यहां ठिठुरन बढ़ा रही हैं। गुप्ता ने कहा कि कड़ाके की सर्दी का यह दौर आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा। अगले २४ घंटों में राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है, जिससे तापमान में और ज्यादा गिरावट होगी। कोहरे के कारण रेल और हवाई यातायात प्रभावित हुआ है। नई दिल्ली और मुंबई से लखनऊ आने वाली और यहां से दिल्ली-मुंबई जाने वाली सभी उड़ानों में विलंब हो रहा है। यही हाल रेलगाडिय़ों का भी है। लखनऊ आने वाली और लखनऊ से होकर बिहार और पश्चिम बंगाल की तरफ जाने वाली सभी रेलगाडिय़ां चार से १२ घंटे विलंब से पहुंच रही हैं। उधर, सर्दी के मद्देनजर लखनऊ में कक्षा आठ तक के स्कूल सात जनवरी तक बंद कर दिए गए हैं। लखनऊ के जिला विद्यालय निरीक्षक गणेश कुमार ने आईएएनएस से कहा कि कड़ाके की सर्दी को देखते हुए यह फैसला किया गया है। बिहार में शीतलहर के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को रविवार की तुलना में पटना के न्यूनतम तापमान में वृद्घि अवश्य दर्ज की गई है, लेकिन शीतलहर के कारण ठंड का कहर जारी है। विभाग के अनुसार पटना में सोमवार को न्यूनतम तापमान ८.८ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो रविवार की तुलना में ०.८ डिग्री सेल्सियस अधिक है। सोमवार को गया सबसे ठंडा जिला रहा जहां का न्यूनतम तापमान ६. ६ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उधर, सर्दी के बढ़ते प्रभाव के कारण वैशाली, गोपालगंज, सीवान, किशनगंज मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों के स्कूल अगले दो दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। पटना मौसम विभाग के प्रभारी निदेशक एस आ़ई लश्कर ने सोमवार को बताया कि मौसम में अगले दो दिनों तक बदलाव की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि पछुआ हवाओं के कारण बिहार के अधिकांश क्षेत्रों में शीतलहर का कहर जारी है। इधर, घने कोहरे के कारण रेल और सड़क मार्ग पर वाहनों का परिचालन प्रभावित हो रहा है। दानापुर रेल मंडल के सूचना जन संपर्क अधिकारी रंजीत सिंह ने बताया कि सोमवार सुबह कोहरे के कारण इस मार्ग पर १३ रेलगाडिय़ां विलंब से चल रही हैं। हिमाचल प्रदेश के मशहूर पर्यटन स्थल मनाली में भी सोमवार सुबह जमकर बर्फबारी हुई। मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। शिमला स्थित मौसम विज्ञान कार्यालय के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया, मनाली में सोमवार सुबह बर्फबारी हुई। बर्फ चार से पांच इंच तक जम गई है। सिंह ने कहा कि मनाली के निकट के कोठी, मारही, गुलाबा और रोहतांग दर्रे के निकट पिछले २४ घंटे के दौरान बर्फबारी हुई। उन्होंने बताया, इस मौसम में मनाली में यह दूसरी बर्फबारी है। इससे पहले नौ नवंबर को बर्फबारी हुई थी।ग्वालियर में सभी स्कूल 7 तक बंदकड़ाके की ठंड के चलते ग्वालियर में सभी निजी एवं सरकारी स्कूलों को 7 जनवरी तक बंद रखने के आदेश जिला प्रशासन ने दिये हैं। प्रशासन ने यह आदेश बच्चों को ठंड से होने वाली परेशानियों के चलते दिया है। गौरतलब है कि उत्तरी हवाओं से पड़ रही कड़ाके की ठंड ने ग्वालियर को भी कंपकपा दिया है।
नई दिल्ली। क्या भारत में बुलेट ट्रेन चल सकती है? इस पर अध्ययन जारी है। रेल मंत्रालय के बुलेट ट्रेन के प्रस्ताव का भारत, फ्रांस और इटली की एक-एक कंपनी अध्ययन कर रही है। पुणो-मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की संभावना पर फिलहाल अध्ययन किया जा रहा है। कंपनियों द्वारा अगले महीने इस संबंध में रिपोर्ट सौंपे जाने की संभावना है। इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार तय करेगी कि इस ट्रेन को चलाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जाए या नहीं। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला किया जाएगा।उल्लेखनीय है कि बुलेट ट्रेन 350 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ने में सक्षम होगी। इसके लिए एक समर्पित गलियारे की जरूरत होगी। अधिकारियों का अनुमान है कि ऐसी ट्रेन के लिए एक किलोमीटर ट्रैक के निर्माण पर करीब 100 से 150 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस योजना के अध्ययन पर करीब 15 करोड़ रु पए खर्च किए जा रहे हैं और यह खर्च समान रूप से रेलवे और महाराष्ट्र सरकार मिलकर उठा रही है।
एमसीआई के प्रस्ताव पर विचार कर रही है सरकारगांवों में प्रैक्टिस के लिए अलग डिग्री पर भी विचारनई दिल्ली। केंद्र सरकार एमबीबीएस के बाद तीन साल ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने वाले डाक्टरों के लिए स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश में 25 फीसदी सीटें आरक्षित करने पर विचार कर रही है। भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को यह प्रस्ताव भेजा है। ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा सेवा बेहतर बनाने और डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार कुछ अन्य प्रस्तावों पर भी विचार कर रही है।स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित हो रहेएमसीआई के अध्यक्ष डा. केतन देसाई ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भारी धनराशि खर्च कर रही है लेकिन डाक्टरों की कमी के कारण ज्यादातर प्राइमरी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित हो रहे हैं। इससे निपटने के लिए एमसीआईर् ने कुछ और महत्वपूर्ण सुझाव भेजा है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित मेडिकल कालेजों में साढ़े तीन साल में ही मेडिकल डिग्री देने का प्रस्ताव शामिल है। ग्रामीण मेडिसिन और सर्जरी में बैचलर डिग्री (बीआरएमएस) के लिए छात्रों का चयन बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। शर्त यह भी होगी कि छात्र की स्कूली शिक्षा दस हजार से कम आबादी वाले गांवों में हुई हो।बोर्डों से पंजीकरण करना होगाबीआरएमएस ग्रेजुएट को राज्य मेडिकल बोर्डों से पंजीकरण करना होगा और उन्हें केवल उसी क्षेत्र में प्रैक्टिस की अनुमति दी जाएगी जिसमें उन्होंने शिक्षा ली है। एमसीआई ने इस संबंध में विचार-विमर्श के लिए आगामी 4 और 5 फरवरी को 300 मेडिकल कालेजों के प्रधानाचार्यों, सभी राज्यों के मेडिकल संस्थानों के निदेशकों और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। दरअसल यह प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय को वर्ष 2000 में ही भेजे गए थे लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डाक्टरों की भारी कमी के मद्देनजर मंत्रालय ने अब इन पर विचार करने की सहमति दी है।
डबवाली (ARUN)- स्थानीय वार्ड नम्बर 13 मीना बाजार से अज्ञात व्यक्ति द्वारा वृद्ध महिला के हाथों से दिन-दिहाड़े सोने की चूडिय़ां उतार कर फरार होने का मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी अनुसार मीना बाजार की वैद्य आसा नन्द वाली गली निवासी अमर ङ्क्षसह पटवारी पत्नी वृद्ध महिला महिन्द्र कौर के हाथों से उस समय जबरदस्ती सोने की चूडिय़ां उतारकर फरार हो गया। जब वह घर पर अकेली थी। वृद्ध महिला महिन्द्र कौर ने जानकारी देते हुए बताया कि उसका बेटा तथा बहू डॉ. गुलाटी के नॄसग होम में दवाई लेने गए हुए थे तथा उस समय वह साग काट रही थी कि तभी एक अज्ञात व्यक्ति उनके घर में दाखिल हुआ तथा कहना लगा की आपकी बहू सुनार की दुकान पर बैठी है तथा उसने सोने की चूडिय़ां बनवानी हैं। डिजाईन के लिए आपकी चूडिय़ां मंगवाई हैं। मेरे इन्कार करने पर उसने जबरदस्ती मेरे हाथों से चूडिय़ां उतार ली तथा फरार हो गया। उन्होंने शोर भी मचाया। जब तक मौहल्लावासी एकत्रित होते तब तक अज्ञात व्यक्ति फरार हो चुका था। इस मामले की सूचना थाना शहर डबवाली को दे दी गई है तथा पुलिस अज्ञात व्यक्ति की तालाश कर रही
डबवाली अग्निकांड के 14वें स्मृति दिवस पर अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के नेताओं एवं हजारों लोगों ने डबवाली अग्निकांड स्मारक स्थल पर पहुंचकर 23 दिसम्बर 1995 को दोपहर 1 बजकर 47 मिनट पर शहीद हुए 442 बच्चों, महिला और पुरूषों को अपनी नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर मंच का संचालन कर रहे अग्निकांड पीडि़त रमेश सचदेवा ने राजनीतिक नेताओं को झिंझोड़ते हुए कहा कि अगर दिल्ली में ब्लू लाईन बस के तले आकर कुत्ता मर जाये तो हाय-तौबा मच जाती है। लेकिन डबवाली में विश्व का सबसे बड़ा अग्निकांड हुआ और इसमें सैंकड़ों बच्चे, महिला और पुरूष तिल-तिल करके मर गये तथा सैंकड़ों ही बच्चे घायल होकर आज अपनी रोजी-रोटी का जुगाड़ जुटाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। लेकिन इस कांड को किसी भी नेता ने वह आवाज नहीं दी, जो आवाज दी जानी चाहिए थी। उन्होंने इस मौके पर उन बच्चों को भी राजनेताओं के आगे प्रस्तुत किया, जिनको सामाजिक धारा में लौटने में पूरी जिन्दगी लग सकती है। इस मौके पर उन्होंने अग्निकांड स्मारक स्थल पर स्थापित लाईब्रेरी के लिए लाईब्रेरियन तथा पुस्तकों की मांग की। इसके अतिरिक्त डबवाली के सरकारी अस्पताल में तत्कालीन सरकार द्वारा घोषित बर्न यूनिट स्थापित करने और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा घोषित मुआवजा राशि को तुरन्त पीडि़तों को दिये जाने तथा सरकार आगे इस मामले को लेकर अपील न करे, की मांग की। 23 दिसम्बर को सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस के रूप में घोषित करके इस प्रकार के उपाय करे कि भविष्य में ऐसी त्रासदी कभी घटित न हो।इस मौके पर डबवाली अग्निकांड के शहीदों को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए हल्का डबवाली के विधायक अजय सिंह चौटाला ने कहा कि दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर सरकार को विवश किया जाएगा कि वह उस समय घोषित वायदे को पूरा करे और मानवता के नाते जो भी राशि उच्च न्यायालय द्वारा घोषित की गई है, उसे तुरन्त पीडि़तों को अदा करे। इस मौके पर उन्होंने अग्निकांड पीडि़तों की आवाज को बुलन्द करने का भी आश्वासन दिया और साथ में कहा कि सरकार पीडि़तों के लिए कब क्या करती है, ये तो बाद की बात है। लेकिन वह अभी 5 अग्निकांड पीडि़तों को चौ. देवीलाल विद्यापीठ, सिरसा में नौकरी देने की घोषणा करते हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपिन्द्र सिंह हुड्डा के पूर्व ओएसडी डॉ. केवी सिंह ने कहा कि फायर विक्टम एसोसिएशन ने लम्बा संघर्ष करके और तकलीफें सह कर इस लड़ाई को जीता है। उनके परिवार के भी चार सदस्य इस कांड में शहीद हुए हैं। उनके अनुसार जिसका इस कांड में कोई आया है, वो इसकी पीड़ा समझ सकता है। वे पहले भी एसोसिएशन के संघर्ष में शामिल थे और अब भी जो कुछ उनसे हो पाएगा, वे करेंगे।सांसद अशोक तंवर ने इस बात को स्वीकार किया कि अग्निकांड पीडि़तों को इलाज के दौरान या अब तक जो मुश्किलें आ रही हैं, वे व्यवस्था की कमी के कारण ही आ रही हैं। वे इस व्यवस्था की कमी को दूर करने का जितना प्रयास कर सकते हैं, उतना प्रयास करेंगे और जो मांगे पीडि़तों ने रखी हैं, उन पर अभी से काम शुरू हो जाएगा तथा कल वे मुख्यमंत्री से भी इस सम्बन्ध में बातचीत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कहीं भी कमी रही है अब भी इन्सानियत के नाते पीडि़तों के समक्ष जो भी समस्या आ रही है, उसका समाधान किया जाना चाहिए।इस अवसर पर पूर्व विधायक डॉ. सीता राम, उपमण्डलाधीश सुभाष चन्द्र गाबा, तहसीलदार राजेन्द्र कुमार, जिला कांग्रेस अध्यक्ष होशियारी लाल शर्मा, संदीप चौधरी, नगरपालिका अध्यक्षा सिम्पा जैन, विनोद बांसल, बसपा नेता लीलू राम आसाखेड़ा आदि उपस्थित थे।

