पाक को सबक सिखाना जरूरी : भागवत

Posted in January 11, 2010
by arun singla

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख डा. मोहन राव भागवत का मानना है कि भारत से कोई दुश्मनी की हिम्मत न कर सके, इसके लिए पाकिस्तान को एक बार सबक सिखाना जरूरी है। संघ प्रमुख का मत है कि मौजूदा समय में भारतीय सीमाएं असुरक्षित हैं। पड़ोसी देशों में जितना पाकिस्तान दुश्मन है, उससे कम खतरा चीन से भी नहीं है। चीन युद्ध जरूर करेगा। नेपाल में उसने माओवादियों के जरिए अपनी जमीन तैयार कर ली है। उधर बांग्लादेश भी भारत की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है और केंद्र सरकार तमाम उन अवसरों को खोती जा रही है, जिसके जरिए देश को अपनी ताकत दिखाने का अवसर मिलता। संघ प्रमुख रविवार को लखनऊ के सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में लखनऊ क्षेत्र के स्वयंसेवकों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संघ के प्रति कोई धारणा बनाने से पहले संघ को समझना होगा। समझने के लिए संघ के करीब आना होगा। संघ प्रमुख ने कहा कि हिन्दुत्व ही देश को एक रख सकता है। हिन्दुत्व के कमजोर होने का ही नतीजा हुआ कि गंधार अफगानिस्तान बन गया। भारत का विभाजन होकर पाकिस्तान बन गया।
संघ हिन्दुत्व को मजबूत करना चाहता है। संतो की भी महती जिम्मेदारी है कि वह हिन्दू समाज को एक करें। संघ प्रमुख ने इशारो-इशारों में शिवसेना और राजनीति में गए स्वयं सेवकों भी कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा कि प्रांत और भाषा के आधार पर भावनाएं भड़काने वाले कभी हिन्दुत्व के समर्थक नहीं हो सकते, वह वोट की फसल जरूर काट सकते हैं। राजधानी में उनके स्वागत में बैनर-होर्डिग लगे होने पर उन्होंने कहा कि संघ के कुछ लोग राजनीति में गए हैं, उन्हें वहां की आदत लग लग गई है, इसलिए वह इस तरह का आचरण कर रहे हैं।
संघ प्रमुख ने अमेरिका को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका खुद अफगानिस्तान और इराक पर तो बमबारी करता है लेकिन भारत को शांति बनाए रखने की नसीहत देता है। दुनिया में बढ़ती अशांति के लिए उन्होंने अहंकारयुक्त कट्टरपन और अमेरिका सरीखी अधिनायकवादी नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं बल्कि विविधता में एकता जरूरी है। अमेरिका दुनिया में अपनी चार प्रतिशत आबादी के लिए दुनिया के 80 प्रतिशत संसाधानों पर कब्जा जमाए रखना चाहता है। डा. भागवत ने कहा कि संघ का लक्ष्य है कि हर आदमी में यह सोच पैदा हो कि वह दुनिया का अंग है। उन्होंने कहा, ''अपने आप को दुनिया का अंग मानकर परस्पर सहयोग का वातावरण बनाओ। दुनिया को परिवार को बनाओ, बाजार मत बनाओ, हिन्दुत्व का यही दर्शन है।''
नक्सलियों के साथ वार्ता पर भी संघ प्रमुख ने अपनी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि जब तक नक्सली गोली बंद न करें, उनके साथ बोली नहीं होनी चाहिए। उन्होंने शासन-प्रशासन को यह सोचना होगा कि आखिर वजह क्या है कि लोग नक्सली बन रहे हैं।